अमृत वाणी
अभ्यास–माला
1. सही कथन के आगे [✓] और गलत कथन के आगे [×] निशान लगाओ:
(क) मधुर वचन औषधि के समान आरामदायक होते हैं।
उत्तर: ✓
(ख) निंदा करने वाले व्यक्ति से हमें दूर रहना चाहिए।
उत्तर: ×
(ग) ज्ञानी व्यक्ति केवल अपने लिए धन का संचय करते हैं।
उत्तर: ×
(घ) हमें अपने मन की व्यथा मन में ही छिपाकर रखनी चाहिए।
उत्तर: ✓
(ङ) सुई का काम तलवार कर सकती है।
उत्तर: ×
(च) गरीबों की मदद करने वाले ही सच्चे अर्थ में बड़े व्यक्ति होते हैं।
उत्तर: ✓
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:
(क) संत कबीरदास के आराध्य कौन थे?
उत्तर: संत कबीरदास के आराध्य निर्गुण-निराकार राम थे।
(ख) ‘कबीर’ शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: ‘कबीर’ शब्द का अर्थ बड़ा, श्रेष्ठ और महान होता है।
(ग) कवि के अनुसार क्या करने पर हमारे जीवन में दुःख कभी नहीं आएगा?
उत्तर: कवि के अनुसार यदि हम सुख के समय भी अपने आराध्य का स्मरण करते रहें, तो जीवन में दुःख आने की संभावना कम हो जाती है।
(घ) कवि रहीम का पूरा नाम क्या था?
उत्तर: कवि रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था।
(ङ) किनके साथ कवि रहीम की गहरी मित्रता थी?
उत्तर: कवि रहीम की गोस्वामी तुलसीदास के साथ गहरी मित्रता थी।
(च) श्रीकृष्ण ने किसके साथ बचपन की मित्रता निभाई थी?
उत्तर: श्रीकृष्ण ने गरीब ब्राह्मण सुदामा के साथ बचपन की मित्रता निभाई थी।
3. संक्षेप में उत्तर दो:
(क) बुरे व्यक्ति की खोज में निकलने पर कवि को क्या अनुभव हुआ?
उत्तर: कवि जब बुरे व्यक्ति की खोज में निकले तो उन्हें कोई बुरा व्यक्ति नहीं मिला। जब उन्होंने अपने मन को देखा, तो पाया कि सबसे अधिक कमियाँ स्वयं उनमें ही हैं।
(ख) अपने शिष्य को बनाने में गुरु किस प्रकार कुम्हार की भूमिका निभाते हैं?
उत्तर: जिस प्रकार कुम्हार घड़े को भीतर से सहारा देता है और बाहर से थपकी देकर उसका आकार सुधारता है, उसी प्रकार गुरु भी प्रेम, शिक्षा और आवश्यक अनुशासन के माध्यम से शिष्य की कमियाँ दूर करके उसे योग्य बनाते हैं।
(ग) साधु की जाति के बारे में पूछने के संदर्भ में कवि ने क्या कहा है?
उत्तर: कवि ने कहा है कि साधु की जाति नहीं, बल्कि उसके ज्ञान को महत्व देना चाहिए। जैसे तलवार का मूल्य होता है, म्यान का नहीं, वैसे ही साधु के ज्ञान का मूल्य होता है, जाति का नहीं।
(घ) कवि रहीम ने ऐसा क्यों कहा है कि थोड़े दिनों के लिए आने वाली विपत्ति अच्छी होती है?
उत्तर: कवि रहीम के अनुसार थोड़े समय की विपत्ति अच्छी होती है, क्योंकि संकट के समय यह पता चल जाता है कि कौन हमारा सच्चा हितैषी है और कौन केवल दिखावे का साथी है।
(ङ) कवि के अनुसार हमें मन की व्यथा किसलिए मन में ही छिपाकर रखनी चाहिए?
उत्तर: कवि के अनुसार अपनी व्यथा सबके सामने प्रकट नहीं करनी चाहिए, क्योंकि लोग उसे सुनकर सहानुभूति तो जता सकते हैं, पर हमारे दुःख को वास्तव में बाँट नहीं सकते।
4. लघु उत्तर दो:
(क) संत कबीरदास का परिचय दो।
उत्तर: संत कबीरदास हिंदी साहित्य के महान संत-कवि थे। वे निर्गुण-निराकार राम के उपासक थे। उन्होंने सरल लोकभाषा में समाज को प्रेम, सत्य, सदाचार और भेदभाव से दूर रहने का संदेश दिया। उनकी रचनाएँ साखियों और दोहों के रूप में प्रसिद्ध हैं।
(ख) कवि रहीम का परिचय प्रस्तुत करो।
उत्तर: रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। वे मुगल सम्राट अकबर के दरबार के प्रमुख विद्वानों में से थे। वे राज्य-कार्य में निपुण होने के साथ-साथ श्रेष्ठ कवि और बड़े दानी भी थे। उनके दोहे नीति, विनम्रता, मित्रता और मानवीय मूल्यों की शिक्षा देते हैं।
(ग) निम्नलिखित साखी का सरल अर्थ लिखो:
मधुर बचन है औषधि, कटुक बचन है तीर।
स्रवन द्वार है संचरै, सालै सकल शरीर।।
उत्तर: इस साखी का अर्थ है कि मीठे वचन औषधि की तरह सुख देते हैं, जबकि कटु वचन तीर की तरह चुभते हैं। कठोर शब्द कानों से सुनकर मन को दुःख पहुँचाते हैं और उनका प्रभाव पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है।
(घ) निम्नलिखित दोहे को गद्य-रूप दो:
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि।।
उत्तर: रहीम कहते हैं कि बड़ी वस्तु को देखकर छोटी वस्तु को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। हर वस्तु का अपना महत्व होता है। जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार किसी काम की नहीं होती।
5. निम्नलिखित दोहों के भावार्थ लिखो:
(क) निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निरमल करै सुभाय।।
उत्तर: इस दोहे का भावार्थ है कि अपनी आलोचना करने वाले व्यक्ति को अपने पास रखना चाहिए। वह हमारी कमियाँ बताकर हमें सुधारने में सहायता करता है और बिना साबुन-पानी के हमारे स्वभाव को निर्मल बनाता है।
(ख) रहिमन निज संपति बिना, कोउ न बिपति सहाय।
बिनु पानी ज्यों जलज को, रवि नहिं सकै बचाय।।
उत्तर: इस दोहे का भावार्थ है कि संकट के समय अपने साधन और सामर्थ्य का विशेष महत्व होता है। जैसे पानी के बिना कमल को सूर्य भी नहीं बचा सकता, वैसे ही मनुष्य को अपनी कठिनाइयों का सामना करने के लिए अपने साधनों और विवेक पर भी निर्भर रहना चाहिए।
पाठ के आस-पास
1. पाठ में आए दोहों को कंठस्थ करो। फिर कबीरदास और रहीम द्वारा रचित ऐसे ही और दोहों का संग्रह करके अपने सहपाठियों के साथ अंत्याक्षरी खेलो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
2. गोस्वामी तुलसीदास के दोहे को पढ़ो और कबीरदास के संबंधित दोहे के साथ इसकी तुलना करो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
3. मीराँबाई के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में अधिक जानकारी एकत्र करो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
भाषा-अध्ययन
1. संत कबीरदास की कविता की भाषा ‘सधुक्कड़ी’ अथवा खिचड़ी भाषा कही जाती है। शिक्षक/शिक्षिका की सहायता से हिंदी की बोलियों के नाम जानो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
2. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखो:
(i) बचन — वचन
(ii) स्रवन — श्रवण
(iii) सरीर — शरीर
(iv) सिष — शिष्य
(v) सुमिरन — स्मरण
(vi) बिथा — व्यथा
3. निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थक शब्द लिखो:
(i) बुरा — भला
(ii) साधु — असाधु
(iii) ज्ञान — अज्ञान
(iv) निर्मल — मलिन
(v) भली — बुरी
(vi) गरीब — अमीर
(vii) मित्र — शत्रु
योग्यता-विस्तार
1. गुरु-शिष्य संबंध विषय पर चर्चा करो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
2. पेड़ की कटाई और जल प्रदूषण के विरुद्ध जागरूकता फैलाओ तथा बचत की आदत विकसित करो।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
आओ, पाठ में आए कुछ शब्दों के अर्थ जानें:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| औषधि | दवा |
| तीर | बाण |
| स्रवन | श्रवण, कान |
| सालै | पीड़ा देता है, चुभता है |
| कोय | कोई |
| सिष | शिष्य |
| कुंभ | घड़ा |
| नियरे | पास, निकट |
| सुभाय | स्वभाव |
| सुजान | ज्ञानी, समझदार व्यक्ति |
| बिथा | व्यथा, दुःख |
| गोय | छिपाकर |
| जलज | कमल |
| बापुरो | बेचारा |
| मिताई | मित्रता |
| निर्गुण | जो गुणों और रूप से परे हो |
| देहावसान | मृत्यु |
| सीख | शिक्षा |
| साखी | उपदेशात्मक दोहा या कथन |
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