धरती पर स्वर्ग
1. आर्यों का आदर्श क्या था?
उत्तर: आर्यों का आदर्श सत्य, धर्म और मानवता की सेवा था।
2. कवि गुप्तजी ने कैसी क्रान्ति की बात कही है?
उत्तर: कवि गुप्त जी ने मनुष्य के अंदर नैतिक और आध्यात्मिक क्रांति की बात की है, जिससे धरती पर स्वर्ग जैसा जीवन संभव हो।
3. दीन-हीन की रक्षा कवि क्यों करना चाहते हैं?
उत्तर: कवि चाहते हैं कि कमजोर, असहाय और दीन-हीन लोगों की रक्षा करके मानवता और न्याय को बनाए रखा जाए।
4. मानव कैसे ईश्वर हो सकते हैं?
उत्तर: सत्य, करुणा, धर्म और सेवा के मार्ग पर चलकर मानव ईश्वर बन सकते हैं।
5. हम धरती को कैसे स्वर्ग बना सकते हैं?
उत्तर: पाप, अत्याचार और असत्य को छोड़कर, भलाई, सेवा और नैतिकता अपनाकर धरती को स्वर्ग बना सकते हैं।
व्याख्या
(क) ‘सुख देने आया, दुःख झेलने आया,
मैं मनुष्यत्य का नाट्य खेलने आया।।’
उत्तर: कवि कह रहे हैं कि मनुष्य को सुख और दुख दोनों अनुभव करने के लिए भेजा गया है, और यह जीवन एक नाट्य की तरह है।
इससे सीख मिलती है कि जीवन में सुख-दुःख से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका अनुभव करना चाहिए।
(ख) ‘संदेश यहांँ मैं नहीं स्वर्ग का लाया,
इस भूतल को ही स्वर्ग बनाने आया।’
उत्तर: कवि यह संदेश दे रहे हैं कि ईश्वर स्वर्ग को पृथ्वी पर भेज नहीं रहे हैं, बल्कि हमें ही अपने कर्म और प्रयास से धरती को स्वर्ग बनाना है।
7. लघु प्रश्न उत्तर
(क) राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म कब और कहांँ हुआ था?
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त 1886 को काशी (वाराणसी), उत्तर प्रदेश में हुआ।
(ख) मैथिलीशरण गुप्त जी की सर्वप्रथम प्रकाशित काव्य कौन सी है?
उत्तर: ‘भारत भारती’
(ग) ‘धरती पर स्वर्ग’ कविता गुप्त जी की किस महाकाव्य से ली गई है?
उत्तर: ‘भारत भारती’
(घ) राम के जीवन का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: राम का उद्देश्य मानवता और धर्म की रक्षा करना और जीवन को आदर्श बनाना था।
(ङ) राम ने मानव अवतार क्यों लिया था?
उत्तर: राम ने मानव अवतार लिया ताकि धरती पर धर्म, सत्य और न्याय स्थापित किया जा सके।
(च) राम इस धरती का रूप कैसा बनाना चाहते हैं?
उत्तर: राम इस धरती को स्वर्ग जैसा आदर्श और न्यायपूर्ण बनाना चाहते हैं।