AHSEC Class 11 Hindi Chapter 16 भक्ति काल Question Answer Assamese Medium | HS 1st Year Hindi Solution 2026

भक्ति काल

1. भक्ति काल का सामान्य परिचय और उसकी प्रमुख शाखाओं का संक्षिप्त परिचय
उत्तर:

    भक्ति काल भारतीय साहित्य का वह काल है जब भक्तिप्रधान काव्य और साहित्य का विकास हुआ। यह 15वीं से 17वीं शताब्दी के बीच मुख्य रूप से प्रचलित था।

    भक्ति काल में धार्मिक, नैतिक और आध्यात्मिक भावनाओं का साहित्यिक रूप सामने आया।

    प्रमुख शाखाएँ:

    निर्गुण भक्ति शाखा – यह शाखा एक निराकार, अनंत और अद्वितीय ईश्वर की उपासना करती है। इसमें जाति, धर्म और रीति से ऊपर उठकर भक्ति का प्रचार किया गया।

    सगुण भक्ति शाखा – इसमें ईश्वर का कोई रूप या रूपांतर (जैसे राम, कृष्ण) लेकर उसकी उपासना की जाती है। इसमें कथाओं, लीला और गीतों के माध्यम से भक्ति व्यक्त की जाती है।

    2. “हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में भक्ति का स्वरूप निर्गुण और सगुण दोनों रूपों में प्रकट हुआ है।” – उसका विवरण
    उत्तर:

      हिंदी साहित्य में निर्गुण भक्ति में ईश्वर निराकार और निरुपाधि माना गया। इसमें संतों ने सामाजिक सुधार और आत्मज्ञान पर ध्यान केंद्रित किया।

      सगुण भक्ति में ईश्वर के रूप और लीलाओं का चित्रण किया गया। कृष्ण और राम की कथाओं के माध्यम से भक्ति व्यक्त की गई।

      दोनों रूपों में भक्ति ने आम जनता के जीवन और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला।

      3. संत निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा का सामान्य परिचय और कबीर दास की देन
      उत्तर:

        निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा में भक्ति का मूल उद्देश्य ईश्वर की आत्मा में रचना और माया से परे सच्चा ज्ञान प्राप्त करना था।

        यह शाखा जाति, पंथ और रीति-रिवाज से ऊपर उठकर सरल, सीधे और भावपूर्ण भक्ति का प्रचार करती थी।

        कबीर दास की देन:

        कबीर ने इस शाखा को अत्यंत सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया।

        उन्होंने सामाजिक पाखंड, जातिवाद और अंधविश्वास का विरोध किया।

        उनके पदों में ईश्वर के प्रति प्रेम, सत्य और अहिंसा का संदेश प्रमुख रूप से मिलता है।

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