उसकी मांँ
- पुलिस सुपरिटेंडेंट ने लाल के चाचा को लाल से सावधान होने को क्यों कहा था?
उत्तर: क्योंकि लाल सक्रिय क्रांतिकारी था और सरकार के लिए खतरा पैदा कर सकता था। - लाल की मांँ का नाम क्या था?
उत्तर: जानकी - प्रस्तुत कहानी में मांँ की तुलना भारत माता से किस रूप में की गई है?
उत्तर: मां को अपने देश की प्रतीक के रूप में देखा गया है, जो अपने बेटे की रक्षा और मार्गदर्शन करती है। - लाल और उसके ग्रुप के अन्य युवकों को फांँसी की सजा क्यों सुनवाई गई?
उत्तर: वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय क्रांतिकारी थे। - लड़कों ने मांँ से अपनी फांँसी की सजा की बात क्यों छुपाई?
उत्तर: मां को दुख से बचाने और उसकी मानसिक शक्ति बनाए रखने के लिए। - प्रस्तुत कहानी के जमींदार के चरित्र पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: जमींदार कठोर, अनुशासनप्रिय और नियमों के पक्के थे। वह अपने खेत और प्रशासन में किसी भी कमजोरी को बर्दाश्त नहीं करते थे। - व्याख्या कीजिए-
“चाचाजी, नष्ट हो जाना तो यहांँ का नियम है। जो संँवारा गया है, वह बिगड़ेगा ही। दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए। कर्म के समय हमारी भुजाएंँ दुर्बल नहीं, भगवान की सहस्र भुजाओं की सखियांँ है।”
उत्तर:
यह कथन कर्म और साहस की महत्ता को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में डर और दुर्बलता को अपने कार्य में बाधक नहीं बनने देना चाहिए। अपने कर्तव्य को पूरा करने में मनुष्य की शक्ति दिव्य सहायता जैसी होती है।
लघु प्रश्न उत्तर
(क) फिएट गाड़ी लेकर कौन आया था?
उत्तर: लाल अपने कार्य के लिए आया था।
(ख) लाल के पिताजी का नाम क्या था? और वे क्या करते थे?
उत्तर: पिता का नाम रामलाल था और वे शिक्षक थे।
(ग) सरकार ने किसे और कौन सी सजा सुनाई थी?
उत्तर: सरकार ने लाल और उसके साथी क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई।
(घ) कौन सी महान कृति में लाल के हस्ताक्षर मौजूद थे?
उत्तर: स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और घोषणाओं में।
(ङ) ‘उसकी मांँ’ कहानी में मुख्य क्रांतिकारी कौन है?
उत्तर: लाल
(च) लाल और उसके साथियों को पुलिस ने किस जुर्म के तहत गिरफ्तार किया था?
उत्तर: ब्रिटिश शासन के खिलाफ देशद्रोह और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय होने के आरोप में।