हार की जीत.
हार की जीत – उत्तर (संक्षेप में)
- खड़क सिंह कौन था?
खड़क सिंह एक डाकू था।
- बाबा भारती के आश्रम में खड़क सिंह क्यों आया था?
पाप और हिंसक जीवन से मुक्ति पाने के लिए।
- सुलतान कौन था?
खड़क सिंह का साथी डाकू।
- ‘इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।’
खड़क सिंह का आश्रम में आकर पापों का त्याग करना और धर्म अपनाना।
- खड़क सिंह के मन में परिवर्तन क्यों आया?
बाबा भारती की बातें, उनके आदर्श और करुणा देखकर।
- कहानी से शिक्षा
सच्चाई, धर्म और करुणा से बुराई पर अच्छाई की विजय संभव है।
- ‘निज की हानि को मनुष्यत्व की हानि पर न्योछावर कर दिया।’
खड़क सिंह ने अपने पुराने अपराध और भौतिक इच्छाएँ छोड़कर मानवता का मार्ग अपनाया।
- खड़क सिंह के चरित्र की विशेषताएँ
साहसी और दृढ़ निश्चयी
पाप छोड़ने और सुधारने की क्षमता
अंत में करुणा और मानवता को अपनाने वाला
- बाबा भारती का चरित्र
धर्म और करुणा के प्रतीक
लोगों को नैतिकता और इंसानियत का मार्ग दिखाने वाले
खड़क सिंह जैसे लोगों का सुधार करने वाले
लघु प्रश्न उत्तर
(क) बाबा भारती अपने घोड़े को ‘सुल्तान’ कहते थे।
(ख) खड़क सिंह ने अपने आप को सुल्तान का सौतेला भाई बताया।
(ग) जीत कर भी खड़क सिंह अपने पुराने पापों से हार गया।
(घ) लेखक का उद्देश्य: बुराई पर अच्छाई की विजय और परिवर्तन की संभावना दिखाना।
(ङ) कहानी का मुख्य नायक: खड़क सिंह
(च) अपाहिज ने बाबा भारती को आश्रम में जाकर लोगों की मदद करने की बात कही।