मुरझाया फूल
(अ) सही विकल्प का चयन करो:
1. कवयित्री महादेवी वर्मा की तुलना की जाती है-
उत्तर: मीराबाई के साथ।
2. कवयित्री महादेवी वर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: फर्रुखाबाद में।
3. महादेवी वर्मा की माता का नाम क्या था?
उत्तर: हेमरानी देवी।
4. ‘हास्य देता था,……….. अंक में तुझको पवन।’
उत्तर: खिलाता।
5. ‘यत्न माली का रहा……….. से भरता तुझे।’
उत्तर: आनंद।
6. करतार ने धरती पर सबको कैसा बनाया है?
उत्तर: स्वार्थमय।
(आ) ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में उत्तर दो:
1. छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा रहस्यवादी कवयित्री के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।
उत्तर: हाँ।
2. महादेवी वर्मा के पिता-माता उदार विचार वाले नहीं थे।
उत्तर: नहीं।
3. महादेवी वर्मा ने जीवन भर शिक्षा और साहित्य की साधना की।
उत्तर: हाँ।
4. वायु पंखा झल फूल को सुख पहुँचाती रहती है।
उत्तर: हाँ (कविता के अनुसार खिले फूल के संदर्भ में)।
5. मुरझाए फूल की दशा पर संसार को दुख नहीं होता।
उत्तर: हाँ।
(इ) पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:
1. महादेवी वर्मा की कविताओं में किनके प्रति विरहानुभूति की तीव्रता परिलक्षित होती है?
उत्तर: महादेवी वर्मा की कविताओं में अपने ‘अज्ञात प्रियतम’ (ईश्वर) के प्रति विरहानुभूति की तीव्रता परिलक्षित होती है।
2. महादेवी वर्मा का विवाह कब हुआ था?
उत्तर: महादेवी वर्मा का विवाह छोटी आयु में ही हो गया था, जब वे प्रारंभिक शिक्षा (संभवतः छठी कक्षा) प्राप्त कर रही थीं।
3. महादेवी वर्मा ने किस रूप में अपने कर्म-जीवन का श्रीगणेश किया था?
उत्तर: महादेवी वर्मा ने प्रयाग महिला विद्यापीठ की ‘प्राचार्या’ के रूप में अपने कर्म-जीवन का श्रीगणेश किया था।
4. फूल कौन-सा कार्य करते हुए भी हरषाता (प्रसन्न रहता) रहता है?
उत्तर: फूल अपना सर्वस्व (सुगंध और मधु) दूसरों को दान करते हुए भी हरषाता रहता है।
5. भ्रमर फूल पर क्यों मँडराने लगते हैं?
उत्तर: भ्रमर फूल के मीठे मधु (मकरंद) का पान करने के लोभ में उसके चारों ओर मँडराने लगते हैं।
(ई) अति संक्षिप्त उत्तर दो:
1. किन गुणों के कारण महादेवी वर्मा की काव्य-रचनाएँ हिंदी-पाठकों को विशेष प्रिय रही हैं?
उत्तर: महादेवी वर्मा ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और विरहानुभूति को केवल स्वयं तक सीमित न रखकर उसे ‘लोक-कल्याणकारी करुणा’ और व्यापक मानवीय संवेदना से जोड़ दिया है। इसी संवेदनशीलता और भाषा की मधुरता के कारण उनकी रचनाएँ पाठकों को विशेष प्रिय हैं।
2. महादेवी वर्मा की प्रमुख काव्य-रचनाएँ क्या-क्या हैं? किस काव्य-संकलन पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था?
उत्तर: उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं— नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत और दीपशिखा। उन्हें उनके प्रसिद्ध काव्य-संकलन ‘यामा’ पर ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
3. फूल किस स्थिति में धरा पर पड़ा हुआ है?
उत्तर: फूल अब मुरझा चुका है और अपनी कोमलता व सुगंध खोकर धूल में बेजान पड़ा है। वह अब उपेक्षित है और कोई भी उसे उठाने या प्यार करने वाला नहीं है।
4. खिले फूल और मुरझाए फूल के साथ पवन के व्यवहार में कौन-सा अंतर देखने को मिलता है?
उत्तर: पवन खिले हुए फूल को अपनी गोद में लेकर झुलाता था और थपकियाँ देकर सुलाता था। लेकिन वही पवन अब मुरझाए हुए फूल को अपने तीव्र झोंके से डंठल से तोड़कर निर्दयतापूर्वक जमीन पर गिरा देता है।
5. खिले फूल और मुरझाए फूल के प्रति भौंरे के व्यवहार में क्या भिन्नता होती है?
उत्तर: जब फूल खिला रहता है, तब भौंरे उसके मधु के लालच में उसके चक्कर काटते हैं और मधुर गुंजन करते हैं। परंतु फूल के मुरझाते ही वे उसका साथ छोड़ देते हैं और उसकी ओर मुड़कर भी नहीं देखते।
(उ) संक्षिप्त उत्तर दो:
1. महादेवी वर्मा की साहित्यिक देन का उल्लेख करो।
उत्तर: महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य के छायावाद स्तंभ की प्रमुख कवयित्री हैं। उन्हें ‘आधुनिक युग की मीरा’ कहा जाता है। उन्होंने गद्य और पद्य दोनों में श्रेष्ठ साहित्य रचा है। उनके रेखाचित्र (अतीत के चलचित्र) और संस्मरण (स्मृति की रेखाएँ) हिंदी गद्य की अनमोल निधि हैं। उन्होंने नारी शिक्षा और समाज सुधार के लिए भी सक्रिय योगदान दिया।
2. खिले फूल के प्रति किस प्रकार सब आकर्षित होते हैं, पठित कविता के आधार पर वर्णन करो।
उत्तर: खिला हुआ फूल प्रकृति और जीव-जंतुओं के आकर्षण का केंद्र होता है। चंद्रमा की किरणें उसे अपनी चांदनी से हंसाती हैं, ओस की बूंदें मोतियों से उसका श्रृंगार करती हैं, पवन उसे झूला झुलाता है और भौंरे उसके चारों ओर संगीत गाते हुए मधु-पान करते हैं। माली भी बड़े यत्न से उसे सींचता और उसकी रक्षा करता है।
3. पठित कविता के आधार पर मुरझाए फूल के साथ किए जाने वाले बर्ताव का उल्लेख करो।
उत्तर: मुरझाए फूल के साथ व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है। जिस पवन ने उसे झुलाया था, वही उसे नीचे गिरा देता है। भ्रमर उसका साथ छोड़ देते हैं और माली भी उसकी उपेक्षा करता है। यह इस बात का प्रतीक है कि संसार केवल उपयोगिता और सुंदरता का सम्मान करता है।
4. पठित कविता के आधार पर दानी सुमन (फूल) की भूमिका पर प्रकाश डालें।
उत्तर: फूल एक ‘त्यागी’ और ‘दानी’ की भूमिका निभाता है। वह निस्वार्थ भाव से अपनी सुगंध वातावरण में फैलाता है और अपना मधु भौंरों को समर्पित कर देता है। अंत में वह स्वयं मुरझाकर धूल में मिल जाता है, लेकिन दूसरों को खुशी देने का अपना स्वभाव नहीं छोड़ता।
(ऊ) सम्यक उत्तर दो:
1. ‘मुरझाया फूल’ शीर्षक कविता में फूल के बारे में क्या-क्या कहा गया है?
उत्तर: कविता में फूल के माध्यम से जीवन के दो पहलुओं—उदय और अस्त—को दिखाया गया है। फूल जब खिला था, तब वह प्रकृति का लाड़ला था; सबको सुगंध और मधु देता था। लेकिन मुरझाते ही वह एकाकी और उपेक्षित हो गया। कवयित्री ने फूल के माध्यम से संसार की निष्ठुरता और स्वार्थपरता को दर्शाया है कि यहाँ केवल उगते हुए सूरज (खिले फूल) को ही सलाम किया जाता है।
2. ‘मुरझाया फूल’ कविता के माध्यम से कवयित्री ने मानव जीवन के संदर्भ में क्या संदेश दिया है?
उत्तर: इस कविता के माध्यम से महादेवी वर्मा ने गहरा दार्शनिक संदेश दिया है। वे बताती हैं कि मनुष्य का यौवन और ऐश्वर्य स्थायी नहीं है। जैसे फूल का खिलना और मुरझाना निश्चित है, वैसे ही मनुष्य के जीवन में सुख-दुख और उत्थान-पतन आते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि यह संसार स्वार्थ से भरा है। अतः, हमें फूल की तरह निस्वार्थ भाव से कर्म करना चाहिए और अंत में उपेक्षा मिलने पर दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि यही जीवन की रीति है।
(ए) प्रसंग सहित व्याख्या करो:
1. ‘स्निग्ध किरणें चंद्र की…… शृंगारती थीं सर्वदा।’
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ महादेवी वर्मा द्वारा रचित कविता ‘मुरझाया फूल’ से ली गई हैं।
प्रसंग: यहाँ खिले हुए फूल की सुंदरता और प्रकृति के साथ उसके प्रेमपूर्ण संबंधों का वर्णन है।
व्याख्या: कवयित्री कहती हैं कि जब फूल खिला हुआ था, तब चंद्रमा की शीतल किरणें उसे अपनी चाँदनी से नहलाकर हंसाती थीं। रात के समय ओस की बूंदें उस पर गिरकर मोतियों के समान लगती थीं, मानो प्रकृति स्वयं उस फूल का अनमोल श्रृंगार कर रही हो।
2. ‘कर रहा अठखेलियाँ………. था कभी क्या ध्यान में।’
संदर्भ: पूर्ववत।
प्रसंग: यहाँ कवयित्री मुरझाए फूल को उसके गौरवशाली अतीत की याद दिलाते हुए वर्तमान की विडंबना प्रकट कर रही हैं।
व्याख्या: कवयित्री मुरझाए हुए फूल से पूछती हैं कि क्या तुझे कभी यह आभास भी था कि जिस उपवन में तू कभी शान से झूमता था और सबके आकर्षण का केंद्र था, अंत में तेरी ऐसी दशा होगी? तू जो कभी सबके दिलों पर राज करता था, आज जमीन पर धूल में पड़ा है और कोई तुझे देखने वाला भी नहीं है। यह काल चक्र की अनिश्चितता का प्रतीक है।