ASSEB Class 9 Hindi Chapter 14 (साबरमती के संत) Question Answer 2026 | Class 9 Hindi Chapter 14 Solution

साबरमती के संत

(अ) सही विकल्प का चयन करो:

1. ‘गांधी तेरी मशाल’ का किस अर्थ में प्रयोग हुआ है?
उत्तर: गांधीजी के आदर्श और उनके दिखाए सत्य-अहिंसा के मार्ग के लिए।

2. स्वाधीनता से पहले भारत पर किसका शासन था?
उत्तर: अंग्रेजों का।

3. गांधी जी को प्यार से लोग क्या कहकर पुकारते थे?
उत्तर: बापू।

4. गांधी जी के ऊँचे मस्तक के सामने किसकी चोटी भी झुकती थी?
उत्तर: हिमालय की।

(आ) पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:

1. ‘साबरमती के संत’ किसे कहा गया है?
उत्तर: ‘साबरमती के संत’ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को कहा गया है।

2. गांधी जी ने क्या कमाल कर दिखाया?
उत्तर: गांधी जी ने बिना हथियार उठाए, केवल सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजों की दासता से भारत को आजाद कराकर कमाल कर दिखाया।

3. महात्मा गांधी का वास्तविक हथियार क्या था?
उत्तर: महात्मा गांधी का वास्तविक हथियार ‘सत्य’ और ‘अहिंसा’ था।

4. गांधी जी ने लोगों को किस मार्ग पर चलना सिखाया?
उत्तर: गांधी जी ने लोगों को सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलना सिखाया।

(इ) संक्षिप्त उत्तर लिखो:

1. गांधीजी की संगठन शक्ति के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर: गांधीजी में अद्भुत संगठन शक्ति थी। उनकी एक पुकार पर पूरा भारतवर्ष एक सूत्र में बँध जाता था। वे जिधर भी कदम बढ़ाते थे, उनके पीछे लाखों मजदूरों, किसानों, हिंदुओं, मुस्लिमों, सिखों और पठानों का जन-सैलाब उमड़ पड़ता था। उन्होंने समाज के हर वर्ग को एकजुट किया और बिना किसी गोला-बारूद के, केवल एकता और संकल्प के बल पर अंग्रेजों के विरुद्ध एक विशाल अहिंसक मोर्चा खड़ा किया।

2. गांधीजी ने किस प्रकार अंग्रेजों से टक्कर ली थी?
उत्तर: गांधीजी ने अंग्रेजों से टक्कर लेने के लिए पारंपरिक युद्ध नीति का सहारा नहीं लिया। उन्होंने न तो हथियार चलाए और न ही शत्रुओं के किलों पर चढ़ाई की। इसके बजाय उन्होंने शरीर पर मात्र एक धोती धारण कर और हाथ में लाठी लेकर ‘सत्याग्रह’ को अपना अस्त्र बनाया। उन्होंने समस्त देशवासियों को एकजुट कर अहिंसक आंदोलनों के जरिए ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ें हिला दीं और अंततः देश को स्वतंत्र कराया।

3. प्रस्तुत गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर: ‘साबरमती के संत’ गीत महात्मा गांधी के महान व्यक्तित्व और उनके अविस्मरणीय योगदान की गौरवगाथा है। गीतकार प्रदीप बताते हैं कि बापू ने बिना खड्ग (तलवार) और बिना ढाल के एक ऐसा अद्भुत संग्राम लड़ा जिसने दुनिया को चकित कर दिया। गांधीजी का जीवन सत्य का शिखर था, जिसके सामने हिमालय भी नतमस्तक था। जब भी उन्होंने आजादी का बिगुल बजाया, पूरा देश उनके पीछे चल पड़ा। उन्होंने स्वयं कष्ट सहकर और अपमान का विष पीकर देशवासियों को स्वतंत्रता का अमृत प्रदान किया। अंत में कवि भावुक होकर कहते हैं कि जब बापू की चिता जली, तो उनकी विदाई में समस्त संसार रो पड़ा था।

4. ‘साबरमती के संत’ गीत के आधार पर गांधीजी के व्यक्तित्व पर एक संक्षिप्त लेख लिखो।
उत्तर: महात्मा गांधी का व्यक्तित्व सादगी, दृढ़ संकल्प और उच्च आदर्शों का संगम था। वे ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ के जीवंत प्रतीक थे। एक साधारण फकीर की तरह रहने वाले बापू ने साबित कर दिया कि आत्मशक्ति भौतिक हथियारों से कहीं अधिक बलवान होती है। वे हिंसा के घोर विरोधी थे और कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सत्य के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उनके नेतृत्व में निर्भयता थी और उनके हृदय में समस्त मानवता के लिए करुणा थी, जिसने उन्हें एक जन-नेता से ऊपर उठाकर ‘महात्मा’ बना दिया।

(ई) भावार्थ लिखो:

(क) मन में थी अहिंसा की बदन पे थी लंगोटी, लाखों में लिए घूमता था सत्य की चोटी।
भावार्थ: इन पंक्तियों का आशय बापू की वैचारिक दृढ़ता से है। गांधीजी का बाह्य स्वरूप अत्यंत साधारण था—वे केवल एक लंगोटी धारण करते थे। परंतु उनके मन में अहिंसा का अटूट भाव था और वे सत्य के उस ऊँचे शिखर (चोटी) पर विराजमान थे, जहाँ तक पहुँचना किसी साधारण मनुष्य के लिए अत्यंत कठिन है। उनकी इसी सादगी और सत्यनिष्ठा के पीछे लाखों लोग खिंचे चले आते थे।

(ख) माँगा न तूने कोई तख्त बेताज ही रहा, अमृत दिया सभी को खुद जहर पिया।
भावार्थ: इन पंक्तियों में बापू के निस्वार्थ त्याग को दर्शाया गया है। भारत को स्वतंत्र कराने के बाद गांधीजी चाहते तो कोई भी बड़ा पद या सत्ता प्राप्त कर सकते थे, परंतु उन्होंने पद का लोभ न कर ‘बेताज बादशाह’ बने रहना स्वीकार किया। उन्होंने समाज के संघर्षों और कष्टों का विष स्वयं सहा ताकि देशवासी स्वतंत्रता की सुखद वायु में सांस ले सकें। उन्होंने दूसरों के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

1. प्रदीप के गीतों की मूल विशेषता क्या है?
उत्तर: कवि प्रदीप के गीतों की मूल विशेषता उनमें निहित प्रखर देशभक्ति, ओजस्विता और मानवीय संवेदना है। उनकी भाषा अत्यंत सरल और सुबोध है, फिर भी वह जनमानस को आंदोलित करने और प्रेरित करने की अद्भुत क्षमता रखती है।

2. कविता के अनुसार गांधीजी ने हमें स्वाधीनता कैसे दी थी?
उत्तर: कविता के अनुसार, गांधीजी ने पारंपरिक शस्त्रों (खड्ग या ढाल) का प्रयोग किए बिना, केवल सत्य और अहिंसा के आत्मिक बल पर हमें स्वाधीनता दिलाई। उन्होंने नैतिक शक्ति को अपना हथियार बनाकर विश्व की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति को परास्त किया।

3. महात्मा गांधी को बेमिसाल इंसान क्यों बताया गया है?
उत्तर: महात्मा गांधी को बेमिसाल इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्होंने घृणा का उत्तर प्रेम से और हिंसा का उत्तर अहिंसा से दिया। उनकी सादगी इतनी प्रभावी थी कि उनके ऊँचे आदर्शों के सामने हिमालय की चोटी भी नतमस्तक प्रतीत होती थी। उन्होंने निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा की।

4. गांधीजी के आह्वान पर कौन-कौन लड़ने चले थे?
उत्तर: गांधीजी के एक आह्वान पर जाति, धर्म और वर्ग की दीवारें टूट गईं। उनके पीछे हिंदू, मुस्लिम, सिख, पठान, किसान और मजदूर—सभी एक साथ चल पड़े। जवाहरलाल नेहरू जैसे महान नेता भी उनके पदचिन्हों पर चलते हुए स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े।

5. गांधीजी की संगठन शक्ति के बारे में तुम क्या जानते हो?
उत्तर: गांधीजी की संगठन शक्ति अद्वितीय थी। उन्होंने अपनी सत्यनिष्ठा से करोड़ों भारतीयों के हृदय में विश्वास जगाया। वे जिधर भी कदम बढ़ाते थे, वहाँ एक जन-सैलाब उमड़ पड़ता था। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति को भी देश की आजादी के मुख्य उद्देश्य से जोड़ने में सफलता प्राप्त की।

6. प्रस्तुत गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
उत्तर: यह गीत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि है। इसमें बताया गया है कि कैसे साबरमती के इस संत ने बिना किसी रक्तपात के भारत को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराया। यह गीत बापू के साहस, उनकी संगठन शक्ति और उनके ‘स्वत्व’ (आत्म-सम्मान) के बोध को रेखांकित करता है।

7. ‘साबरमती के संत’ गीत के आधार पर गांधीजी के व्यक्तित्व पर एक संक्षिप्त लेख लिखो।
उत्तर: महात्मा गांधी का व्यक्तित्व सादगी और संकल्प का अद्भुत मिश्रण था। शरीर पर मात्र एक लंगोटी और हाथ में लाठी लिए इस ‘हाथी’ जैसी मदमस्त चाल वाले फकीर ने अहिंसा को एक अमोघ अस्त्र बना दिया। उनका व्यक्तित्व ‘सादा जीवन उच्च विचार’ का साक्षात् प्रमाण था, जिसने पूरी दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाया।

8. गांधीजी ने किस प्रकार अंग्रेजों से टक्कर ली थी?
उत्तर: गांधीजी ने अंग्रेजों से ‘सत्याग्रह’ के माध्यम से टक्कर ली। उन्होंने नमक सत्याग्रह और असहयोग जैसे आंदोलनों के जरिए अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का शांतिपूर्ण विरोध किया। उनकी अहिंसक नीति ने अंग्रेजों को नैतिक रूप से कमजोर कर दिया और अंततः उन्हें भारत छोड़ने पर विवश कर दिया।

9. ‘साबरमती के संत’ कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस अमर गीत के रचनाकार सुप्रसिद्ध कवि और गीतकार रामचंद्र द्विवेदी, जिन्हें दुनिया ‘प्रदीप’ के नाम से जानती है, हैं।

    विवरणात्मक प्रश्न

    1. प्रस्तुत कविता के आधार पर स्वाधीनता आन्दोलन में गांधीजी की भूमिका पर एक लेख लिखो।
    उत्तर: भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में गांधीजी की भूमिका एक पथ-प्रदर्शक और सेनापति की थी, जिसने बिना शस्त्र उठाए युद्ध जीता। उन्होंने आंदोलन को केवल राजनीतिक संघर्ष न बनाकर इसे एक नैतिक आंदोलन बना दिया। उन्होंने ‘चुपचाप’ सहने की प्रवृत्ति को ‘अहिंसक प्रतिरोध’ में बदल दिया। उनके नेतृत्व में भारत का बच्चा-बच्चा निर्भय हो गया। उन्होंने दांडी मार्च और भारत छोड़ो जैसे आंदोलनों से जन-जन में चेतना फूँकी, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गई।

    2. ‘गांधीजी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे।’ इस कविता के आधार पर स्पष्ट करो।
    उत्तर: कविता की पंक्तियाँ “चुभता था किसी को तो तुझे दर्द होता था” और “सत्य की चोटी” स्पष्ट करती हैं कि गांधीजी के लिए अहिंसा केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक धर्म था। वे दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझते थे। उन्होंने सिद्ध किया कि सत्य का मार्ग कठिन जरूर है, लेकिन उस पर चलकर प्राप्त की गई विजय स्थायी होती है। उनके जीवन में कथनी और करनी का अंतर नहीं था।

    3. ‘साबरमती के संत’ गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखो।
    उत्तर: (यह उत्तर संक्षिप्त प्रश्न संख्या 6 का विस्तृत रूप है।) यह गीत साबरमती के तट से उठी उस आवाज का वर्णन है जिसने पूरे देश को जगा दिया। कवि प्रदीप कहते हैं कि बापू ने बिना किसी ढाल-तलवार के वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े राजा-महाराजा नहीं कर सके। उन्होंने नफरत को प्यार से जीता और ‘अमृत’ (आजादी) सबको देकर स्वयं संघर्षों का ‘जहर’ पिया।

    4. साबरमती के संत ने कैसे अंग्रेजों को देश से निकाल कर देश को आजाद किया?
    उत्तर: गांधीजी ने अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति का जवाब ‘एकता’ से दिया। उन्होंने चरखे और खादी को स्वावलंबन का प्रतीक बनाया और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर अंग्रेजों की आर्थिक कमर तोड़ दी। उनके ‘सविनय अवज्ञा’ के सामने अंग्रेजों के कानून बौने साबित हुए। जनता के अटूट समर्थन और गांधीजी के अडिग मनोबल ने अंग्रेजों को यह अहसास करा दिया कि अब भारत पर शासन करना असंभव है।

    5. ‘साबरमती के संत’ नामक कविता का सारांश लिखो।
    उत्तर: यह कविता/गीत बापू के उन चमत्कारी कार्यों का वर्णन करती है, जो उन्होंने साबरमती आश्रम से संचालित किए। उन्होंने न केवल देश को भौगोलिक आजादी दिलाई, बल्कि भारतीयों के मन से दासता का भय भी निकाल दिया। यह गीत बापू के त्याग, बलिदान और उनकी अमर मशाल की गौरव गाथा है।

    1. आशय स्पष्ट करो:

      (क) वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी, सर देख के झुकती थी हिमालय की भी चोटी।
      उत्तर: इन पंक्तियों का आशय है कि गांधीजी का शरीर दुबला-पतला और वेशभूषा अत्यंत साधारण थी, परंतु उनके विचार और नैतिक कद इतने ऊँचे थे कि उनके सामने दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत हिमालय भी छोटा प्रतीत होता था। उनकी महानता उनके बाह्य स्वरूप में नहीं, बल्कि उनके आंतरिक आत्मबल में थी।

      (ख) दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
      उत्तर: इन पंक्तियों का आशय यह है कि इतिहास में प्रायः आजादी युद्धों और रक्तपात से मिलती है, परंतु गांधीजी ने एक नया इतिहास रचा। उन्होंने बिना तलवार उठाए और बिना रक्षा-ढाल के, केवल अहिंसा के अद्भुत प्रयोग से भारत को स्वतंत्र कराया। यह संपूर्ण विश्व के लिए एक सुखद आश्चर्य और ‘कमाल’ जैसा चमत्कार था।

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