परीक्षा
1. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:
(क) परीक्षा कहानी में किस पद के लिए परीक्षा ली गई है?
उत्तर: ‘परीक्षा’ कहानी में देवगढ़ रियासत के दीवान पद के लिए परीक्षा ली गई है।
(ख) दीवान साहब के समक्ष क्या शर्त रखी गई?
उत्तर: महाराज ने दीवान सुजान सिंह के समक्ष यह शर्त रखी कि वे स्वयं ही अपने उत्तराधिकारी (नए दीवान) का चयन करेंगे।
(ग) परीक्षा कहानी में उम्मीदवार कौन सा सामूहिक खेल खेलते हैं?
उत्तर: परीक्षा कहानी में उम्मीदवार हॉकी का सामूहिक खेल खेलते हैं।
(घ) दीवान के पद के लिए किसका चयन किया गया?
उत्तर: दीवान के पद के लिए पंडित जानकीनाथ का चयन किया गया।
2. संक्षिप्त उत्तर दो:
(क) दीवान सुजान सिंह ने महाराज से क्या प्रार्थना की? क्यों?
उत्तर: दीवान सुजान सिंह ने महाराज से प्रार्थना की कि उन्हें दीवान पद से मुक्त कर दिया जाए, क्योंकि उन्होंने 40 वर्षों तक रियासत की सेवा की है और अब वे अपना शेष समय परमात्मा की भक्ति में बिताना चाहते हैं। वे बूढ़े हो चुके थे और उन्हें डर था कि बुढ़ापे में राजकाज में कोई भूल हो गई तो उनकी जीवनभर की नेकनामी मिट्टी में मिल जाएगी।
(ख) उम्मीदवार विभिन्न प्रकार के अभिनय कैसे और क्यों कर रहे थे?
उत्तर: उम्मीदवार दीवान पद पाने के लिए स्वयं को नेक और गुणवान दिखाने का अभिनय कर रहे थे। जो देर से सोकर उठते थे, वे सुबह जल्दी बगीचे में घूमने लगे; जो हुक्का पीते थे, वे छिपकर सिगरेट पीने लगे; और जो नौकरों पर चिल्लाते थे, वे अब उनसे ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर बात करने लगे। वे ऐसा इसलिए कर रहे थे ताकि सुजान सिंह को प्रभावित कर सकें और उन्हें दीवान का पद मिल जाए।
(ग) एक उम्मीदवार ने गाड़ी वाले की मदद कैसे की?
उत्तर: हॉकी खेलते समय चोटिल होने के बावजूद एक युवक (पंडित जानकीनाथ) ने देखा कि एक किसान की अनाज से लदी गाड़ी नाले के कीचड़ में फँसी है। युवक ने अपनी चोट की परवाह किए बिना नाले में उतरकर पहिए को ज़ोर से धकेला, जबकि किसान ने बैलों को साधा। युवक की हिम्मत और शक्ति से गाड़ी कीचड़ से बाहर निकल आई।
(घ) किसान ने अपने मददगार युवक से क्या कहा? उसका क्या अर्थ था?
उत्तर: गाड़ी निकालने के बाद किसान (जो वास्तव में सुजान सिंह थे) ने युवक से कहा— “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” इसका अर्थ यह था कि सुजान सिंह को वह सही व्यक्ति मिल गया था जिसमें परोपकार, साहस और आत्मबल जैसे गुण मौजूद थे, जो एक दीवान के लिए अनिवार्य थे।
(ङ) सुजान सिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा कैसे ली?
उत्तर: सुजान सिंह ने एक किसान का भेष धारण किया और अपनी अनाज की गाड़ी को जानबूझकर नाले के कीचड़ में फँसा दिया। उन्होंने ऐसा यह देखने के लिए किया कि उम्मीदवारों में से कौन सा व्यक्ति स्वार्थ त्यागकर एक लाचार किसान की मदद के लिए आगे आता है।
(च) पंडित जानकीनाथ में कौन-कौन से गुण थे?
उत्तर: पंडित जानकीनाथ में दया, साहस, वीरता, परोपकार और कठिन समय में अडिग रहने वाला आत्मबल जैसे श्रेष्ठ मानवीय गुण मौजूद थे।
(छ) सुजान सिंह के मतानुसार दीवान में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर: सुजान सिंह के अनुसार एक दीवान में विशाल हृदय, आत्मबल, साहस और गरीबों के प्रति दया का भाव होना चाहिए। उनका मानना था कि जिस व्यक्ति के हृदय में दया और साहस है, वह कभी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।
3. सप्रसंग व्याख्या करो:
(क) लेकिन, मनुष्य का वह बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठा हुआ देख रहा था कि इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा है।
उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘आलोक भाग-1’ के अंतर्गत मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘परीक्षा’ से ली गई हैं।
व्याख्या: यहाँ ‘बूढ़ा जौहरी’ सुजान सिंह को कहा गया है और ‘बगुले’ उन बनावटी उम्मीदवारों को, जो पद पाने के लिए दिखावा कर रहे थे। सुजान सिंह चुपचाप दूर से सभी उम्मीदवारों के व्यवहार का निरीक्षण कर रहे थे। वे जानते थे कि बाहरी दिखावे के पीछे असली ‘हंस’ यानी नेक दिल इंसान कौन है। वे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जो आंतरिक रूप से शुद्ध और गुणवान हो।
(ख) गहरे पानी में बैठने से मोती मिलता है।
उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्ति मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘परीक्षा’ से ली गई है।
व्याख्या: जब पंडित जानकीनाथ ने चोटिल होने के बाद भी कीचड़ में उतरकर किसान की मदद की, तब सुजान सिंह ने यह बात कही। इसका भाव यह है कि कठिन परिश्रम और जोखिम उठाने के बाद ही श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है। जिस प्रकार समुद्र की गहराई में जाने पर ही मोती मिलता है, उसी प्रकार जानकीनाथ के कठिन परिश्रम और साहस ने उन्हें दीवान पद के योग्य सिद्ध कर दिया।
(ग) उन आँखों में सत्कार था और इन आँखों में ईर्ष्या।
उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘परीक्षा’ से ली गई हैं।
व्याख्या: जब पंडित जानकीनाथ को दीवान घोषित किया गया, तब उपस्थित जनता और रियासत के लोगों की आँखों में उनके प्रति सम्मान (सत्कार) था क्योंकि उन्होंने एक योग्य व्यक्ति को चुना था। इसके विपरीत, अन्य उम्मीदवारों की आँखों में जलन (ईर्ष्या) थी, क्योंकि वे खुद को बेहतर दिखाने का ढोंग तो कर रहे थे, लेकिन संकट के समय एक गरीब की मदद करने का साहस और दया नहीं दिखा सके।
4. किसने किससे कहा, लिखो:
(क) “कहीं भूल-चूक हो जाए तो बुढ़ापे में दाग लगे, सारी जिंदगी की नेकनामी मिट्टी में मिल जाए।”
उत्तर: दीवान सरदार सुजान सिंह ने देवगढ़ के महाराज से कहा।
(ख) “मालूम होता है, तुम यहाँ बड़ी देर से फँसे हुए हो।”
उत्तर: युवक (पंडित जानकीनाथ) ने किसान (भेषधारी सुजान सिंह) से कहा।
(ग) “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।”
उत्तर: किसान (भेषधारी सुजान सिंह) ने युवक (पंडित जानकीनाथ) से कहा।
भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. नीचे लिखी संज्ञाओं में जातिवाचक, व्यक्तिवाचक और भाववाचक संज्ञाएँ पहचानो :
जातिवाचक संज्ञाएँ: शक्ति, सादगी, दया, शिखर
व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ: देवगढ़, दीवान, जानकीनाथ, नारायण
भाववाचक संज्ञाएँ: हंस, खिलाड़ी, अंगरखे, पुल
2. ‘अनुभवशील’ शब्द में ‘अनुभव’ तथा ‘शील’ शब्दों का योग है। इसका अर्थ है अनुभवी। ‘शील’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाओ।
ज्ञानशील
गुणशील
आत्मशील
परिश्रमीशील
सदशील
- निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तित करो :
(क) खिलाड़ी लोग बैठे दम ले रहे थे। (सामान्य वर्तमान)
उत्तर: खिलाड़ी लोग बैठकर दम ले रहे हैं।
(ख) लंबा आदमी सामने खड़ा है। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर: लंबा आदमी सामने खड़ा था।
(ग) ऐसे गुणवाले संसार में कम होते हैं। (सामान्य भविष्य)
उत्तर: ऐसे गुणवाले संसार में कम होंगे।
- दो शब्दों में यदि पहले शब्द के अंत में ‘अ’, ‘आ’ हो और बाद के शब्द के आरंभ में ‘इ’, ‘ई’ या ‘उ’, ‘ऊ’ हो तो उन दोनों में संधि होने पर क्रमशः ‘ए’, अथवा ‘औ’ हो जाता है; जैसे- देव इंद्र देवेंद्र, महा+ईश = महेश, मंत्र+उच्चारण-मंत्रोच्चारण, पर+उपकार=परोपकार।
नीचे लिखे शब्दों में संधि करो –
प्रश्न + उत्तर = प्रश्नोत्तर
गण + ईश = गणेश
वीर + इंद्र = वीरेंद्र
सूर्य + उदय = सूर्योदय
यथा + इच्छा = यथाश्रद्धा
- विलोम शब्द लिखो :
सज्जन – दुष्ट
उपस्थित – अनुपस्थित
उपयुक्त – अनुपयुक्त
अपकार – उपकार
संक्षिप्त प्रश्न (Short Type Questions)
1. दीवान सुजानसिंह ने महाराज से क्या प्रार्थना की? क्यों?
उत्तर: दीवान सुजानसिंह ने महाराज से प्रार्थना की कि उन्हें कुछ समय के लिए परमात्मा की सेवा करने की अनुमति दी जाए। वह बूढ़े हो गए थे और उन्हें राजकाज संभालने की शक्ति नहीं रही। वह नहीं चाहते थे कि बुढ़ापे में किसी भूल-चूक के कारण उनकी जिंदगी की नेकनामी मिट्टी में मिल जाए।
2. उम्मीदवार विभिन्न प्रकार के अभिनय किस प्रकार और क्यों कर रहे थे?
उत्तर: उम्मीदवार अपने रहन-सहन, आचार-विचार और व्यक्तित्व का परीक्षण करने के लिए विभिन्न प्रकार के अभिनय कर रहे थे। यह इसलिए किया जा रहा था ताकि उन्हें यह दिखाना पड़े कि वे इस उच्च पद के लिए योग्य हैं। उन्हें अपनी योग्यताओं और गुणों को दर्शाना था ताकि रियासत के लिए उपयुक्त दीवान का चयन किया जा सके।
3. एक उम्मीदवार ने गाड़ीवाले की मदद किस प्रकार की?
उत्तर: एक उम्मीदवार ने गाड़ीवाले की मदद की जब उसने गाड़ी को दलदल से निकालने का प्रयास किया। उसने पहियों को ढकेलने की कोशिश की और किसान को यह निर्देश दिया कि वह बैलों को साधे। उसकी मेहनत से किसान की गाड़ी नाले के ऊपर चढ़ गई।
4. किसान ने अपने मददगार युवक से क्या कहा? उसका क्या अर्थ था?
उत्तर: किसान ने अपने मददगार युवक से कहा, “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” इसका अर्थ था कि यदि भगवान की कृपा रही, तो यह युवक ही दीवान बनेगा। किसान ने युवक की मदद को सराहा और उसकी सेवा को भगवान की इच्छा के रूप में देखा।
5. सुजानसिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा किस प्रकार ली?
उत्तर: सुजानसिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा उनके गुणों के आधार पर ली। उन्होंने उम्मीदवारों से दया, आत्मबल और साहस के गुणों की पहचान की। अंत में, उन्होंने पंडित जानकीनाथ को उच्च मानकों का प्रतिनिधि मानते हुए चुना।
6. पं. जानकीनाथ में कौन-कौन से गुण हैं?
उत्तर: पं. जानकीनाथ में दया, साहस, उदारता और आत्मबल जैसे गुण हैं। वह एक गरीब किसान की मदद करने में न केवल तत्पर थे, बल्कि उन्होंने अपनी क्षति के बावजूद भी साहस दिखाया।
7. सुजानसिंह के मतानुसार दीवान में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर: सुजानसिंह के मतानुसार दीवान में दया, आत्मबल, साहस और उदारता के गुण होने चाहिए। एक दीवान को समाज के प्रति दयालु होना चाहिए और कठिनाइयों का सामना वीरता से करना चाहिए।
8. परीक्षा पाठ की लेखक कौन हैं? उनके बारे में लिखो।
उत्तर: परीक्षा पाठ के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं, जो हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध उपन्यासकार और कहानीकार माने जाते हैं। उनका साहित्य समाज की वास्तविकताओं, समस्याओं और संघर्षों को दर्शाता है। उन्होंने ग्रामीण जीवन, किसानों की कठिनाइयों और भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं को अपनी कहानियों में खूबसूरती से प्रस्तुत किया है।
9. “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” किसने किससे कहा?
उत्तर: यह वाक्य किसान ने अपने मददगार युवक से कहा, जब युवक ने किसान की गाड़ी निकालने में मदद की थी।
10. “मालूम होता है, तुम यहाँ बड़ी देर से फँसे हुए हो।” किसने किससे कहा?
उत्तर: यह वाक्य युवक ने किसान से कहा, जब युवक ने देखा कि किसान अपनी गाड़ी के कारण फंसा हुआ है।
- प्रेमचन्द की किन्ही दो रचनाओं का नाम लिखो।
गोदान
गबन
विवरणात्मक प्रश्न
1. आशय स्पष्ट करो:
(क) इन बगुलों में हंस कहाँ क्षिपा है?
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि समाज में अनेक ऐसे लोग होते हैं, जो दिखने में साधारण या नकारात्मक होते हैं, लेकिन उनमें कुछ विशेष गुण होते हैं। बगुलों का रूप धारण किए हुए लोग अपने अंदर हंस जैसी विशेषताएँ छिपाए हुए होते हैं। यह पंक्ति समाज में असली योग्यताओं और गुणों की पहचान की आवश्यकता को दर्शाती है।
(ख) गहरे पानी में बैठने से मोती मिलता है?
उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि जीवन में मूल्यवान चीजें प्राप्त करने के लिए हमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गहरे पानी में जाना एक जोखिम है, लेकिन वहां हमें अनमोल मोती मिलते हैं। इसका अर्थ है कि हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साहस और संघर्ष के साथ आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि सरलता से मिलने वाले सुख अक्सर सतही होते हैं।
(ग) उल आँखों में सत्कार था और इन आँखों में ईर्ष्या।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि समाज में लोगों के दृष्टिकोण भिन्न होते हैं। कुछ लोग सम्मान और प्रेम से भरे होते हैं (सत्कार), जबकि अन्य लोग ईर्ष्या और द्वेष से भरे होते हैं। यह पंक्ति दिखाती है कि कैसे विभिन्न भावनाएँ और मनोवृत्तियाँ लोगों के बीच में संघर्ष पैदा कर सकती हैं।
2. प्रेमचंद का साहित्यिक परिचय दो।
उत्तर: मुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी और उर्दू के एक महान लेखक माने जाते हैं। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं, विशेषकर ग्रामीण जीवन, किसानों की समस्याओं और सामाजिक अन्याय को उजागर किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ “गोदान”, “गबन”, “नकली”, और “सेवासदन” हैं। प्रेमचंद का लेखन सामाजिक चेतना को जागरूक करने और मानवीय मूल्यों को उजागर करने का प्रयास करता है। उन्होंने भारतीय साहित्य में नई दिशा दी और समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज़ बने। उनके काम ने आज भी पाठकों को प्रभावित किया है।