ASSEB Class 9 Hindi Chapter 8 (मणि-कांचन संयीग) Question Answer 2026 | Class 9 Hindi Chapter 8 Solution

मणि-कांचन संयीग

1. सही विकल्प का चयन करो:

अ. धुवाहाता-बेलगुरि नामक पवित्र स्थान कहाँ स्थित है?
उत्तर: माजुलि में।

    आ. शंकरदेव के साथ शास्त्रार्थ से पहले माधवदेव थे-
    उत्तर: शाक्त (शक्ति के उपासक)।

    इ. सांसारिक जीवन में शंकरदेव और माधवदेव का कैसा संबंध था?
    उत्तर: मामा-भांजे का।

    ई. शंकरदेव के मुँह से किस ग्रंथ का श्लोक सुनकर माधवदेव निरुत्तर हो गए थे?
    उत्तर: ‘भागवत’ (श्रीमद्भागवत पुराण) का।

    2. किसने किससे कहा, बताओ:
    (क) ‘माँ को शीघ्र स्वस्थ कर दो।’
    उत्तर: माधवदेव ने देवी गोसानी (मनसा देवी/शक्ति) से मनौती मांगते समय कहा।

      (ख) ‘बलि चढ़ाना विनाशकारी कार्य है।’
      उत्तर: बहनोई रामदास ने माधवदेव से कहा।

      (ग) ‘अब तक मैंने कितने ही धर्मशास्त्रों का अध्ययन किया है।’
      उत्तर: माधवदेव ने अपने बहनोई रामदास से (वाद-विवाद के दौरान) कहा।

      (घ) ‘वह एक ही बात से तुम्हें निरुत्तर कर देंगे।’
      उत्तर: रामदास ने माधवदेव से (गुरु शंकरदेव के संदर्भ में) कहा।

      (ङ) ‘यह दीघल-पूरीया गिरि का पुत्र माधव है।’
      उत्तर: रामदास ने श्रीमंत शंकरदेव से माधवदेव का परिचय कराते हुए कहा।

      3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:
      (क) विश्व का सबसे बड़ा नदी-द्वीप माजुलि कहाँ बसा हुआ है?
      उत्तर: विश्व का सबसे बड़ा नदी-द्वीप माजुलि महाबाहु ब्रह्मपुत्र नदी की गोद में बसा हुआ है।

        (ख) श्रीमंत शंकरदेव का जीवन-काल किस ईस्वी से किस ईस्वी तक व्याप्त है?
        उत्तर: श्रीमंत शंकरदेव का जीवन काल 1449 ई. से 1568 ई. तक व्याप्त है।

        (ग) शंकर-माधव का मिलना असम-भूमि के लिए कैसा साबित हुआ?
        उत्तर: शंकर-माधव का मिलन असम-भूमि के लिए ‘सोने में सुगंध’ (मणिकांचन संयोग) जैसा अत्यंत शुभ और कल्याणकारी साबित हुआ।

        (घ) महाशक्ति का आगार ब्रह्मपुत्र क्या देखकर अत्यंत हर्षित हो उठा था?
        उत्तर: ब्रह्मपुत्र नद अपनी गोद (माजुलि) में दो महान विभूतियों—मामा और भांजे—को गुरु और शिष्य के पवित्र बंधन में बँधते देखकर अत्यंत हर्षित हो उठा था।

        (ङ) माधवदेव को शिष्य के रूप में स्वीकार कर लेने के बाद शंकरदेव क्या बोले?
        उत्तर: माधवदेव को शिष्य स्वीकार करने के बाद शंकरदेव ने गद्गद होकर कहा— “तुम्हें पाकर आज मैं पूरा हुआ।”

        (च) किस घटना से असम के सांस्कृतिक इतिहास में एक सुनहरे अध्याय का श्रीगणेश हुआ था?
        उत्तर: धुवाहाता-बेलगुरि में शंकरदेव और माधवदेव के ऐतिहासिक महामिलन से असम के सांस्कृतिक इतिहास में एक सुनहरे युग का प्रारंभ हुआ था।

        4. अति संक्षिप्त उत्तर दो:
        (क) ब्रह्मपुत्र नदी किस प्रकार शंकरदेव-माधवदेव के महामिलन का साक्षी बना था?
        उत्तर: असम की जीवनरेखा ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य स्थित माजुलि द्वीप के ‘धुवाहाता-बेलगुरि’ नामक स्थान पर ही इन दोनों महापुरुषों का मिलन हुआ था। भौगोलिक रूप से यह स्थान ब्रह्मपुत्र की गोद में होने के कारण, नदी इस ऐतिहासिक घटना की प्रत्यक्ष साक्षी बनी।

          (ख) धुवाहाता-बेलगुरि सत्र में रहते समय श्रीमंत शंकरदेव किस महान प्रयास में जुटे हुए थे?
          उत्तर: उस समय असमिया समाज अंधविश्वास, बलि-विधान और जटिल धार्मिक कर्मकांडों में जकड़ा हुआ था। शंकरदेव समाज को इन कुरीतियों से मुक्त कर ‘एकशरण नाम-धर्म’ के सरल और आध्यात्मिक मार्ग पर ले जाने के प्रयास में जुटे थे।

          (ग) माधवदेव ने कब और क्या मनौती मानी थी?
          उत्तर: अपनी पैतृक संपत्ति भाई को सौंपकर लौटते समय जब माधवदेव को अपनी माँ की गंभीर बीमारी का पता चला, तो वे अत्यंत व्याकुल हो उठे। तब उन्होंने देवी गोसानी से मनौती मानी कि माँ के स्वस्थ होने पर वे उन्हें सफेद बकरों का एक जोड़ा बलि चढ़ाएंगे।

          (घ) ‘इसके लिए आवश्यक धन देकर माधवदेव व्यापार के लिए निकल पड़े।’ – प्रस्तुत पंक्ति का संदर्भ स्पष्ट करो।
          उत्तर: माँ के स्वस्थ होने पर माधवदेव अपनी मनौती पूरी करना चाहते थे। उन्होंने अपने बहनोई रामदास को बलि के लिए सफेद बकरे खरीदने का काम सौंपा और इसके लिए उन्हें धन देकर स्वयं अपने व्यापारिक कार्यों के लिए बाहर चले गए।

          (ङ) ‘माधवदेव आपसे शास्त्रार्थ करने के लिए आया है।’ – किसने किससे और किस परिस्थिति में ऐसा कहा था?
          उत्तर: यह वाक्य रामदास ने गुरु शंकरदेव से कहा था। जब बलि-प्रथा को लेकर रामदास और माधवदेव के बीच गहरा तर्क-वितर्क हुआ और माधवदेव रामदास की बातों से सहमत नहीं हुए, तब रामदास उन्हें समाधान के लिए शंकरदेव के पास ले गए।

          5. संक्षेप में उत्तर दो:
          (क) शंकर-माधव के महामिलन के संदर्भ में ‘मणिकांचन संयोग’ आख्या की सार्थकता स्पष्ट करो।
          उत्तर: ‘मणिकांचन’ का अर्थ है मणि और कंचन (सोना) का मेल। शंकरदेव साक्षात् मणि के समान प्रकाशमान थे और माधवदेव शुद्ध स्वर्ण के समान बहुमूल्य। इन दोनों के मिलन से असम के वैष्णव धर्म और संस्कृति में जो निखार आया, वह अद्वितीय था। जिस प्रकार सोने में मणि जड़ने से उसकी शोभा बढ़ जाती है, वैसे ही इन दोनों महापुरुषों के साथ आने से असम का सामाजिक और सांस्कृतिक ढाँचा सुदृढ़ हो गया।

            (ख) बहनोई रामदास के घर पहुँचने पर माधवदेव ने क्या पाया और उन्होंने क्या किया?
            उत्तर: रामदास के घर पहुँचने पर माधवदेव ने देखा कि उनकी माँ अब स्वस्थ हो रही हैं। उन्होंने ईश्वर का आभार व्यक्त किया। माँ के पूर्ण स्वस्थ होने पर उन्होंने अपनी मनौती पूरी करने के उद्देश्य से रामदास से बलि के लिए बकरे लाने का अनुरोध किया और उन्हें धन सौंपा।

            (ग) रामदास ने बलि-विधान के विरोध में माधवदेव से क्या-क्या कहा?
            उत्तर: रामदास ने तर्क दिया कि बलि चढ़ाना एक विनाशकारी और तामसिक कार्य है। उन्होंने कहा कि “इस लोक में जो जीव की हत्या करता है, उसे परलोक में उसी जीव के हाथों कटना पड़ता है।” उन्होंने माधवदेव को समझाया कि परमपिता परमेश्वर जीव-हत्या से नहीं, बल्कि भक्ति से प्रसन्न होते हैं।

            (घ) शास्त्रार्थ के दौरान शंकरदेव द्वारा उद्धृत ‘भागवत’ के श्लोक का अर्थ सरल हिंदी में प्रस्तुत करो।
            उत्तर: श्लोक का अर्थ है— जिस प्रकार किसी वृक्ष की जड़ (मूल) में पानी डालने से उसकी टहनियाँ, पत्ते और फल स्वतः पोषित हो जाते हैं, और जिस प्रकार भोजन करने से शरीर की समस्त इंद्रियाँ तृप्त हो जाती हैं; उसी प्रकार केवल एक परमेश्वर (अच्युत/कृष्ण) की आराधना करने से समस्त देवी-देवता स्वतः संतुष्ट हो जाते हैं। अलग से बलि या पूजा की आवश्यकता नहीं रहती।

            (ङ) शंकरदेव की साहित्यिक देन को स्पष्ट करो।
            उत्तर: शंकरदेव ने असमिया साहित्य को समृद्ध किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं— कीर्तन-घोष, गुणमाला, भक्ति-प्रदीप और रुक्मिणी-हरण काव्य। उन्होंने ‘अंकिया नाट’ (जैसे: राम विजय, पारिजात हरण) और ‘बरगीत’ की रचना कर असमिया संस्कृति को नई दिशा दी।

            (च) माधवदेव की साहित्यिक देन को स्पष्ट करो।
            उत्तर: माधवदेव की सबसे महान कृति ‘नाम-घोष’ है, जिसे असमिया समाज में ‘हजारी घोष’ भी कहा जाता है। उन्होंने भक्ति-रत्नावली, चोर-धरा, दधि-मंथन (नाटक) और सैकड़ों बरगीतों की रचना की, जो आज भी असम के जन-जीवन का अटूट हिस्सा हैं।

            6. सम्यक उत्तर दो:
            (क) माधवदेव की माँ की बीमारी के प्रसंग को सरल हिंदी में वर्णन करो।
            उत्तर: माधवदेव का अपनी माँ के प्रति अगाध प्रेम था। जब उन्हें माँ की बीमारी का समाचार मिला, तो वे शाक्त परंपरा के अनुयायी होने के कारण देवी की शरण में गए। उनकी व्याकुलता और फिर माँ के ठीक होने पर उनकी कृतज्ञता यह दर्शाती है कि वे एक समर्पित पुत्र थे। इसी बीमारी के प्रसंग ने अंततः उन्हें शंकरदेव तक पहुँचाया, क्योंकि माँ के ठीक होने पर बलि देने के प्रश्न ने ही उस ऐतिहासिक शास्त्रार्थ की नींव रखी।

              (ख) बलि हेतु बकरे खरीदने को लेकर रामदास और माधवदेव के बीच हुई बातचीत को अपने शब्दों में प्रस्तुत करो।
              उत्तर: माधवदेव अपनी मनौती के प्रति दृढ़ थे और बकरों की बलि देना अपना धार्मिक कर्तव्य मानते थे। वहीं रामदास, जो शंकरदेव के प्रभाव में वैष्णव बन चुके थे, अहिंसा के पक्षधर थे। माधवदेव ने जब शास्त्र का हवाला दिया, तो रामदास ने उन्हें चुनौती दी कि वे शंकरदेव से शास्त्रार्थ करें। यह संवाद अंधविश्वास बनाम तर्क और हिंसा बनाम अहिंसा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने अंततः माधवदेव का हृदय परिवर्तन कर दिया।

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