भारत की भाषिक एकता
1. पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के जवाब दो:
(क) संसार का सबसे पहला ग्रंथ कौन-सा है?
उत्तर: पाठ के अनुसार वेद संसार के सबसे प्राचीन ग्रंथों में माने जाते हैं।
(ख) कालिदास ने किस भाषा में रचना की थी?
उत्तर: कालिदास ने संस्कृत भाषा में रचनाएँ की थीं।
(ग) आर्य मूल की भाषाओं और अनार्य मूल की भाषाओं के दो-दो उदाहरण प्रस्तुत करो।
उत्तर:
आर्य मूल की भाषाएँ: हिंदी, असमिया।
अनार्य मूल की भाषाएँ: तमिल, तेलुगु।
(घ) किन तत्वों के कारण भारतीय भाषाओं में एकता का भाव परिलक्षित होता है? उल्लेख करो।
उत्तर: भारत एक बहुभाषी देश है। यहाँ अलग-अलग भाषा-परिवारों की अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, फिर भी उनमें कई समान तत्व दिखाई देते हैं।
भारतीय भाषाओं में एकता के प्रमुख कारण हैं—
- अनेक भारतीय भाषाओं पर संस्कृत का गहरा प्रभाव है।
- बहुत-से तत्सम और तद्भव शब्द अनेक भाषाओं में समान रूप से मिलते हैं।
- रामायण, महाभारत, पंचतंत्र आदि ग्रंथों की कथाएँ अनेक भारतीय भाषाओं में प्रचलित हैं।
- अरबी, फारसी और अंग्रेजी से आए कई शब्द विभिन्न भारतीय भाषाओं में समान रूप से प्रयुक्त होते हैं।
- विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के आपसी संपर्क से भाषाओं में शब्दों का आदान-प्रदान हुआ है।
- भारतीय भाषाओं की अनेक लिपियों का विकास प्राचीन ब्राह्मी लिपि से हुआ है।
- अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले लोग एक ही सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े हुए हैं।
इन्हीं कारणों से भारतीय भाषाओं में विविधता होते हुए भी एकता का भाव दिखाई देता है।
(ङ) हिंदी भाषा की लिपि को क्या कहते हैं? इस लिपि का विकास किस प्राचीन लिपि से माना जाता है?
उत्तर: हिंदी भाषा को लिखने के लिए देवनागरी लिपि का प्रयोग किया जाता है। देवनागरी लिपि का विकास प्राचीन ब्राह्मी लिपि से हुआ माना जाता है।
समय के साथ ब्राह्मी से विभिन्न लिपियों का विकास हुआ और आगे चलकर नागरी तथा आधुनिक देवनागरी लिपि का रूप विकसित हुआ।
(च) पाठ में कुछ तत्सम शब्दों का उल्लेख हुआ है, जैसे—स्वर्ग, देवता, शत, पुष्प, प्रिय, चतुर्थ, मध्य, वचन, नव आदि। इस प्रकार के कुछ और शब्द खोजकर एक तालिका बनाओ।
उत्तर:
| क्रम | तत्सम शब्द | सामान्य अर्थ/रूप |
|---|---|---|
| 1 | सूर्य | सूरज |
| 2 | चन्द्र | चाँद |
| 3 | अग्नि | आग |
| 4 | जल | पानी |
| 5 | वायु | हवा |
| 6 | पृथ्वी | धरती |
| 7 | नेत्र | आँख |
| 8 | हस्त | हाथ |
| 9 | मुख | मुँह |
| 10 | रात्रि | रात |
| 11 | दिवस | दिन |
| 12 | गृह | घर |
| 13 | मार्ग | रास्ता |
| 14 | पुत्र | बेटा |
| 15 | ज्ञान | विद्या/जानकारी |
(छ) हिंदी में अनेक विदेशी भाषाओं के शब्द प्रयुक्त होने लगे हैं। हिंदी में सामान्यतः व्यवहार होने वाले कुछ अंग्रेजी और कुछ अरबी-फारसी शब्दों के उदाहरण दो।
उत्तर:
(i) अंग्रेजी से आए शब्द:
फिल्म, स्टेशन, स्कूल, टेबल, इंटरनेट, मोबाइल, ट्रेन, बैंक।
(ii) अरबी से आए शब्द:
किताब, दुनिया, खबर, तारीख, कानून, अदालत, हक, जवाब।
(iii) फारसी से आए शब्द:
आवाज़, बाजार, गुलाब, दरवाजा, उम्मीद, दोस्त, रंग, चश्मा।
(ज) आधुनिक भारतीय भाषाओं में सबसे पहले किस भाषा में रामायण का अनुवाद हुआ था? बाद में किन-किन भाषाओं में रामायण का अनुवाद या पुनर्रचना हुई और उनके रचनाकार कौन-कौन थे?
उत्तर: वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत रामायण के आधार पर भारत की अनेक भाषाओं में रामकथा की रचनाएँ हुईं।
प्रमुख उदाहरण—
- तमिल — कवि कंबन ने कंब रामायण की रचना की।
- असमिया — माधव कंदली ने रामायण का असमिया रूप प्रस्तुत किया।
- बंगाली — कृतिवास ओझा ने कृतिवासी रामायण की रचना की।
- अवधी — गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की।
- ओड़िया — बलराम दास ने जगमोहन रामायण की रचना की।
इस प्रकार रामकथा विभिन्न भारतीय भाषाओं में फैलकर भारतीय साहित्य और संस्कृति की एकता का महत्त्वपूर्ण माध्यम बनी।
(झ) आओ, इन शब्दों के तत्सम रूप लिखें:
पिता, माता, भाई, घर, हाथ, पाँव, मोर
उत्तर:
| शब्द | तत्सम रूप |
|---|---|
| पिता | पितृ |
| माता | मातृ |
| भाई | भ्रातृ |
| घर | गृह |
| हाथ | हस्त |
| पाँव | पाद |
| मोर | मयूर |
अतिरिक्त प्रश्न–उत्तर
1. कब एक भाषा मृत भाषा कहलाती है?
उत्तर: जब किसी भाषा का दैनिक जीवन में बोलना और लिखना लगभग समाप्त हो जाए तथा नई पीढ़ी उसका प्रयोग करना छोड़ दे, तब वह भाषा धीरे-धीरे मृत भाषा कहलाने लगती है।
किसी भाषा को जीवित और विकसित बनाए रखने के लिए उसका नियमित प्रयोग, अध्ययन, लेखन और साहित्य-सृजन आवश्यक है। अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और प्रेम रखना भी बहुत जरूरी है।
पाठ के आस-पास
1. हमारे देश में प्रचलित विभिन्न भाषाओं की अपनी-अपनी लोककथाएँ और लोकगीत हैं। विभिन्न भाषाओं की कुछ लोककथाओं और लोकगीतों का संग्रह करो।
उत्तर:
| भाषा | लोककथा/लोकपरंपरा | विषय |
|---|---|---|
| असमिया | तेजिमोला | अन्याय, दुख और अंततः न्याय |
| बंगाली | ठाकुरमार झुली की कथाएँ | लोककथा, जादुई घटनाएँ और राजकुमार-राजकुमारी |
| पंजाबी | हीर-रांझा | प्रेम कथा |
| राजस्थानी | ढोला-मारू | प्रेम और वीरता |
| हिंदी | पंचतंत्र की लोकप्रचलित कथाएँ | नीति और बुद्धिमत्ता |
| कश्मीरी | हब्बा खातून से जुड़ी लोककथाएँ/गीत | प्रेम और विरह |
| असमिया | बिहू गीत | प्रेम, प्रकृति और कृषि जीवन |
2. ‘विविधता में एकता’ भारतवर्ष की प्रमुख विशेषता है। हमारे देश में कैसी-कैसी विविधताएँ दिखाई देती हैं और उन विविधताओं के बीच एकता के तत्व क्या हैं?
उत्तर:
| विविधता का प्रकार | उदाहरण | एकता के तत्व |
|---|---|---|
| भाषाई विविधता | हिंदी, असमिया, तमिल, बंगाली, मराठी आदि | आपसी संपर्क और भाषाई आदान-प्रदान |
| धार्मिक विविधता | हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि | सहिष्णुता और परस्पर सम्मान |
| वेशभूषा | मेखला-चादर, साड़ी, पगड़ी, धोती, सलवार-कमीज़ आदि | भारतीय सांस्कृतिक पहचान |
| भोजन | चावल, रोटी, इडली, डोसा, ढोकला आदि | एक-दूसरे की खाद्य-संस्कृति को स्वीकार करना |
| त्योहार | बिहू, दीपावली, ईद, पोंगल, क्रिसमस आदि | मिल-जुलकर उत्सव मनाना |
| भौगोलिक विविधता | पर्वत, मैदान, मरुस्थल, पठार और समुद्र तट | एक ही राष्ट्र का हिस्सा होना |
| कला और संस्कृति | नृत्य, संगीत, लोककला और साहित्य | साझा सांस्कृतिक विरासत |
| राष्ट्रीय पहचान | विभिन्न राज्य और समुदाय | संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान |
प्रतिवेदन:
भारत अनेक भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों, वेशभूषाओं और परंपराओं वाला विशाल देश है। अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जीवन-शैली भिन्न है, फिर भी सभी भारतीय एक ही राष्ट्र के नागरिक हैं।
भारत का संविधान, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, स्वतंत्रता संग्राम की साझा विरासत और परस्पर सम्मान की भावना हमें एक सूत्र में बाँधती है। इसलिए भारत को ‘विविधता में एकता’ का देश कहा जाता है।
3. भारत की विभिन्न भाषाओं में रचित उत्कृष्ट साहित्य को विशिष्ट पुरस्कारों और सम्मानों से स्वीकृति दी जाती है। नीचे दिए गए प्रारूप के अनुसार तालिका बनाओ।
उत्तर:
| भाषा | साहित्यकार | पुरस्कार/सम्मान |
|---|---|---|
| असमिया | डॉ. वीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य | ज्ञानपीठ पुरस्कार |
| असमिया | मामणि रयछम गोस्वामी | ज्ञानपीठ पुरस्कार |
| हिंदी | महादेवी वर्मा | ज्ञानपीठ पुरस्कार |
| हिंदी | सुमित्रानंदन पंत | ज्ञानपीठ पुरस्कार |
| कन्नड़ | यू. आर. अनंतमूर्ति | ज्ञानपीठ पुरस्कार |
| मलयालम | एम. टी. वासुदेवन नायर | ज्ञानपीठ पुरस्कार |
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