HS 2nd Hindi Chapter 2 Question Answer| Class 12 Hindi Chapter 2 जिसने दुख पाला हो Question Answer 2026

जिसने दुख पाला हो

1. कवयित्री महादेवी वर्मा के काव्यों की भावभूमि कैसी है?

उत्तर: कवयित्री महादेवी वर्मा के काव्यों की भावभूमि अत्यंत संवेदनशील और करुणामय है। उनके साहित्य में विरह-वेदना, पीड़ा और आत्मिक अनुभवों का प्रमुख स्थान है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत दुःख और भावनाओं को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है। उनके काव्य में छायावाद की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। साथ ही, उनकी विचारधारा पर वेद-उपनिषदों के अद्वैतवाद तथा बौद्ध दर्शन के दुःखवाद का गहरा प्रभाव पड़ा है।

2. प्रस्तुत कविता में ‘मधुशाला’ शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: इस कविता में ‘मधुशाला’ शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में किया गया है। इसका अर्थ है ‘संसार रूपी मदिरालय’। कवयित्री ने जीवन को एक ऐसी मधुशाला के रूप में प्रस्तुत किया है, जहाँ मनुष्य सुख-दुःख रूपी रस का अनुभव करता है।

3. ‘मेरी साँसों से निर्मित उन अधरों का प्याला’ से कवयित्री क्या कहना चाहती हैं?

उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवयित्री यह कहना चाहती हैं कि वे अपने जीवन की समस्त भावनाएँ और अभिलाषाएँ उन महान व्यक्तियों को समर्पित करना चाहती हैं, जो स्वयं दुःख सहकर दूसरों को सुख प्रदान करते हैं। यह पंक्ति त्याग, करुणा और परोपकार की भावना को दर्शाती है।

4. ‘जिसने दुख पाला हो’ कविता का सारांश लिखिए।

उत्तर: यह कविता महादेवी वर्मा की करुणा और संवेदना से भरपूर रचना है। इसमें कवयित्री ने उन व्यक्तियों की प्रशंसा की है, जो जीवन के दुःखों को धैर्यपूर्वक सहते हैं और फिर भी दूसरों को सुख देने का प्रयास करते हैं। कवयित्री ऐसे लोगों को महान मानती हैं, जो स्वयं कष्ट झेलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते हैं।
वे कहती हैं कि वे अपने आँसुओं की माला उसी को अर्पित करेंगी, जिसने दुःख को चंदन की तरह अपनाया हो। ऐसे व्यक्ति जीवन में आने वाले तूफानों का सामना हँसते हुए करते हैं और परोपकार की भावना से दूसरों का भला करते हैं।

1. निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए—

    “जो उजाला देता हो
    जल-जल अपनी ज्वाला में,
    अपना सुख बाँट दिया हो
    जिसने इस मधुशाला में,
    हँस हलाहल प्याला ढाला हो
    अपनी मधु की हाला में,
    मेरी साँसों से निर्मित उन अधरों का प्याला हो।”

    उत्तर:

    संदर्भ:
    प्रस्तुत पंक्तियाँ महादेवी वर्मा द्वारा रचित ‘जिसने दुख पाला हो’ कविता से ली गई हैं।

    प्रसंग:
    यहाँ कवयित्री उन महान व्यक्तियों का गुणगान कर रही हैं, जो अपने दुःखों को सहकर दूसरों को सुख प्रदान करते हैं।

    व्याख्या:
    कवयित्री कहती हैं कि संसार में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो स्वयं कष्ट सहकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते हैं। वे अपने सुखों का त्याग कर दूसरों को खुशियाँ बाँटते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने दुःख रूपी विष को भी हँसते-हँसते स्वीकार कर लेते हैं। कवयित्री उनकी महानता से प्रभावित होकर अपनी भावनाओं और अभिलाषाओं को उनके चरणों में अर्पित करना चाहती हैं।

    विशेष:
    इन पंक्तियों में त्याग, करुणा, परोपकार तथा छायावादी भावधारा का सुंदर चित्रण किया गया है।

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