मानव – शांति
1. प्रस्तुत कविता किस काव्य ग्रंथ से ली गयी है?
उत्तर: प्रस्तुत कविता रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के प्रसिद्ध काव्य ग्रंथ ‘कुरुक्षेत्र’ से ली गयी है।
2. युधिष्ठिर कौन थे?
उत्तर: युधिष्ठिर पांडवों में सबसे बड़े भाई थे। उन्हें धर्मराज कहा जाता है, क्योंकि वे सत्य और धर्म का पालन करने वाले थे। वे यमराज के पुत्र माने जाते हैं।
3. मानवता की राह रोककर कौन खड़ा है?
उत्तर: मानवता के विकास के मार्ग में सामाजिक विषमता, अन्याय, लोभ और स्वार्थ जैसी बाधाएँ पर्वत के समान खड़ी हैं, जो मनुष्य की उन्नति में रुकावट बनती हैं।
4. वैयक्तिक भोगवाद का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: वैयक्तिक भोगवाद के कारण समाज में असमानता और स्वार्थ की भावना बढ़ी है। लोग केवल अपने सुख के लिए संचय करने लगे हैं, जिससे सामाजिक संतुलन बिगड़ गया है। इसके परिणामस्वरूप संघर्ष, अशांति और असंतोष फैल गया है तथा समाज में आपसी सहयोग की भावना कम हो गई है।
5. ‘मानव शांति’ कविता का भावार्थ प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
‘मानव शांति’ कविता में कवि दिनकर ने महाभारत के प्रसंग के माध्यम से शांति और समानता का संदेश दिया है। भीष्म पितामह युधिष्ठिर को समझाते हैं कि पृथ्वी किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि सभी मनुष्यों का उस पर समान अधिकार है।
कवि बताते हैं कि जब तक समाज में धन, सुख और संसाधनों का समान वितरण नहीं होगा, तब तक शांति स्थापित नहीं हो सकती। वर्तमान अशांति का मुख्य कारण सामाजिक विषमता और स्वार्थ है। पहले लोग सामूहिक जीवन जीते थे और एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी होते थे, लेकिन अब लोग केवल अपने हित के बारे में सोचते हैं।
कवि का निष्कर्ष है कि समता, न्याय और समान अधिकारों के आधार पर ही सच्ची शांति संभव है।
6. व्याख्या
(क) “धर्मराज, यूं ही किसी की … इसके सभी निवासी।”
उत्तर:
संदर्भ: यह पंक्तियाँ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित ‘मानव शांति’ कविता से ली गई हैं, जो ‘कुरुक्षेत्र’ काव्य ग्रंथ का भाग है।
प्रसंग: भीष्म पितामह युद्ध के बाद युधिष्ठिर को जीवन और समाज के सत्य समझा रहे हैं।
व्याख्या:
भीष्म कहते हैं कि पृथ्वी किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है। यह किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है, बल्कि इस पर रहने वाले सभी मनुष्य इसके समान अधिकारी हैं। यहाँ जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त है।
इस प्रकार कवि समाज में समानता और न्याय की स्थापना पर बल देते हैं।
विशेष: इसमें समानता और सार्वभौमिक अधिकार की भावना व्यक्त हुई है।
(ख) “जब तक मनुज-मनुज का यह … संघर्ष नहीं कम होगा।”
उत्तर:
संदर्भ: यह पंक्तियाँ ‘मानव शांति’ कविता से ली गई हैं, जिसे दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ में प्रस्तुत किया है।
प्रसंग: भीष्म पितामह युधिष्ठिर को बताते हैं कि संसार में अशांति का मूल कारण क्या है।
व्याख्या:
भीष्म कहते हैं कि जब तक मनुष्यों के बीच असमानता बनी रहेगी, तब तक संघर्ष समाप्त नहीं होगा। यदि एक व्यक्ति के पास अधिक सुख-सुविधाएँ हों और दूसरे के पास आवश्यक साधन भी न हों, तो समाज में अशांति बनी रहेगी।
अतः शांति के लिए आवश्यक है कि सभी को समान अवसर और संसाधन मिलें।
विशेष: इन पंक्तियों में सामाजिक समानता और न्याय को शांति का आधार बताया गया है।