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HS 2nd Hindi Chapter 6 Question Answer | Class 12 Hindi Chapter 6 भास्कर वर्मन Question Answer 2026

भास्कर वर्मन

(क) अति लघु प्रश्न उत्तर (1 Mark)

1. भास्कर वर्मण कहाँ के राजा थे?
उत्तर: भास्कर वर्मण प्राग्ज्योतिषपुर (कामरूप) के राजा थे।

2. स्थाणीश्वर के सम्राट कौन थे?
उत्तर: स्थाणीश्वर के सम्राट हर्षवर्धन थे।

3. हर्षवर्धन का सेनानायक कौन था?
उत्तर: हर्षवर्धन का सेनानायक सिंहनाद था।

4. प्राग्ज्योतिषपुर के अमात्य एवं राजदूत कौन थे?
उत्तर: हंसवेग।

5. भास्कर वर्मण की माता का नाम क्या था?
उत्तर: श्यामा।

6. सम्राट हर्ष की विधवा बहन कौन थी?
उत्तर: राज्यश्री।

7. कंकु कौन थी?
उत्तर: कंकु राजप्रासाद की दासी तथा युद्धभूमि में भास्कर की सहायक थी।

8. भास्कर वर्मण किस वंश के थे?
उत्तर: भगदत्त वंश के।

9. राज्यश्री के पति का नाम क्या था?
उत्तर: ग्रहवर्मा।

10. किसने राज्यश्री को छलपूर्वक कैद किया था?
उत्तर: देवगुप्त।

11. भास्कर वर्मण की किससे मित्रता थी?
उत्तर: हर्षवर्धन से।

12. चीनी धर्मयात्री कौन था?
उत्तर: ह्वेनसांग (श्युआनच्यांग)।

13. तिब्बत के राजा का नाम क्या था?
उत्तर: गुम नोइ वांग।

14. तिब्बत के राजदूत का नाम क्या था?
उत्तर: वांग हुएन त्से।

15. वह अश्वारोही धनुर्धर कौन था?
उत्तर: कंकु।

(ख) संक्षेप में उत्तर (2 Marks)

1. किसने प्रतिहारियों को क्या काम सौंपा था?
उत्तर: महामात्य ने प्रतिहारियों को यह कार्य दिया था कि वे उस व्यक्ति का पता लगाएँ जो प्रतिदिन आकर हस्तिदंत पर पुष्पहार अर्पित करता है।

2. भास्कर वर्मण विवाह क्यों नहीं करना चाहते थे?
उत्तर: वे अपने पिता को दिए वचन के कारण अविवाहित रहना चाहते थे। साथ ही वे स्वयं को प्रजा का सेवक मानते थे और उनका जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित था।

3. घृतिशर्मा ने भास्कर वर्मण से क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने बताया कि उनके पिता द्वारा ब्राह्मणों को दी गई भूमि शशांक ने छीन ली है और उन्हें वहाँ से निकाल दिया गया है।

4. भास्कर वर्मण साधारण बिस्तर पर क्यों सोते थे?
उत्तर: वे प्रजा के दुःख और अभाव को स्वयं अनुभव करना चाहते थे, इसलिए साधारण जीवन अपनाते थे।

5. कंकु ने भास्कर की जान कैसे बचाई?
उत्तर: उसने कुण्डल के संकेत द्वारा हर्षवर्धन और सैनिकों को सहायता के लिए बुलाया, जिससे भास्कर बच गए।

6. भास्कर वर्मण ने किन क्षेत्रों की प्रजा को सुखी न बना पाने की बात कही?
उत्तर: चीन सीमा से बंगाल सागर तक और हिमालय से मगध तक की प्रजा।

7. शशांक के हाथी क्यों भड़क गए थे?
उत्तर: जलते हुए तीरों और मशालों के कारण।

8. कंकु ने युद्धभूमि में भास्कर से क्या कहा?
उत्तर: उसने सावधान करते हुए कहा कि यह युद्धभूमि है, व्यायामशाला नहीं—इसलिए सावधानी से आगे बढ़ें।

10. “मैं विषकन्या बन चुकी हूँ…” यह कथन किसने कहा?
उत्तर: कंकु ने राज्यश्री से कहा।

11. भारत की नदियों की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: नदियाँ उपजाऊ भूमि बनाती हैं, जीवनदायिनी हैं और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक मानी जाती हैं।

    (ग) दीर्घ उत्तर (4 Marks)

    1. ‘शत्रु का शत्रु मित्र होता है’ – स्पष्ट कीजिए।

      उत्तर: महामात्य ने यह नीति इसलिए प्रस्तुत की क्योंकि शशांक, भास्कर वर्मण और हर्षवर्धन—दोनों का शत्रु था। इस आधार पर दोनों के बीच मित्रता होना स्वाभाविक था। इस नीति को स्वीकार कर भास्कर वर्मण ने हर्षवर्धन से मित्रता की और शशांक के विरुद्ध संयुक्त रूप से कार्य करने का निर्णय लिया।

      2. ‘भास्कर धनुष का छूटा तीर है…’ – आशय स्पष्ट कीजिए।

        उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि भास्कर वर्मण अपने लक्ष्य के प्रति अडिग और दृढ़ निश्चयी थे। वे एक बार जो ठान लेते थे, उसे पूरा करके ही रहते थे। युद्ध में भी वे बिना भय के आगे बढ़ते रहे और अपने उद्देश्य—शत्रु पर विजय—को प्राप्त करने के लिए संकल्पित रहे।

        3. कुण्डल के संकेत से भास्कर की जान कैसे बची?

          उत्तर: जब भास्कर शत्रुओं से घिर गए, तब कंकु ने चतुराई से कुण्डल को तीर में बाँधकर हर्षवर्धन और अन्य सैनिकों की ओर भेजा। इससे उन्हें संकट का संकेत मिला और वे तुरंत सहायता के लिए पहुँचे, जिससे भास्कर की जान बच गई।

          4. भास्कर वर्मण का चरित्र-चित्रण कीजिए।

            उत्तर: भास्कर वर्मण एक आदर्श, वीर और न्यायप्रिय राजा थे।

            साधारण जीवन: राजा होते हुए भी सादगीपूर्ण जीवन जीते थे।

            प्रजाप्रेमी: अपनी प्रजा के दुःख-दर्द को समझते और उनके हित में कार्य करते थे।

            एकता के समर्थक: भारत की एकता और अखंडता में विश्वास रखते थे।

            पराक्रमी योद्धा: युद्ध में अत्यंत साहसी और वीर थे।

            न्यायप्रिय: अपने लोगों को भी दोषी होने पर दंड देने में संकोच नहीं करते थे।

            वचनबद्ध: पिता को दिए वचन का जीवनभर पालन किया।

            नारी सम्मान: महिलाओं के प्रति आदर और सम्मान की भावना रखते थे।

            इस प्रकार भास्कर वर्मण एक आदर्श शासक, महान योद्धा और उच्च चरित्र वाले व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत होते हैं।

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