दिल्ली की आपबीती
1. दिल्ली का नामकरण किसने किया था?
उत्तर: दिल्ली का नाम पुराणों और इतिहास के अनुसार राजा धिल्लि या दिल्ली के राजा ने रखा।
2. संयुक्ता की शादी किससे हुई थी?
उत्तर: संयुक्ता की शादी बाहरी राजवंश या महत्वपूर्ण शासक से हुई थी।
3. दिल्ली को बनाने और बिगाड़ने में बाहरी शक्तियों का क्या योगदान रहा है?
उत्तर: दिल्ली कई बार विजित हुई और पुनर्निर्मित हुई।
मुगल, तुर्क, अंग्रेज और अन्य बाहरी आक्रमणकारियों ने इसके निर्माण और विनाश में भूमिका निभाई।
4. दिल्ली की नीव किसने और कब रखी थी?
उत्तर: दिल्ली की नीव वंशानुगत राजाओं और मुगल शासकों द्वारा विभिन्न कालों में रखी गई। विशेष रूप से, तुर्क और सुलतान काल में मजबूत किले और इमारतें बनीं।
5. मुगल शासन के समय दिल्ली का उत्कर्ष किस प्रकार हुआ है?
उत्तर: कला, स्थापत्य और संस्कृति में दिल्ली ने शिखर प्राप्त किया।
लाल किला, जामा मस्जिद और अन्य ऐतिहासिक इमारतें बनीं।
व्यापार और प्रशासनिक महत्व बढ़ा।
6. ‘हजार साल की अपनी जिंदगी में बराबर-बनती-बिगड़ती रही हूंँ।’- ‘दिल्ली’ के इस कथन की समीक्षा कीजिए।
उत्तर: दिल्ली का इतिहास उतार-चढ़ाव वाला रहा है।
युद्ध, आक्रमण और शासन परिवर्तन ने इसे बार-बार प्रभावित किया।
यह कथन शहर के स्थायित्व और परिवर्तनशीलता दोनों को दर्शाता है।
व्याख्या
(क) ‘मेरी हवा में इतनी कराह कभी न उठी थी, मेरी जमीन आंँसुओं से इतनी गिली कभी न हुई थी, जितनी आज हुई। मेरा कभी हताश न होने वाला दिल भी एक बार बैठ गया। सूरज जो दूसरे दिन मेरे महलों के पीछे से निकला तो बोला, जैसा कल था, वैसा आज नहीं।’
उत्तर:
यह दिल्ली की पीड़ा और संकट के समय की अभिव्यक्ति है।
युद्ध, तबाही और मानव-संघर्ष ने शहर को दुखी किया।
नया सूरज यह संकेत देता है कि हर कठिनाई के बाद बदलाव और पुनर्निर्माण संभव है।
(ख) ‘जमुना के तीर खड़ी जब-जब मैंने अंगड़ाई ली है, तख्त उलट गए हैं, जमाने ने करवट ली है।’
उत्तर:
यह दिल्ली के ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
नगर ने कई शासकों को देखा, राजसिंहासन बदले, और समय के साथ इसका स्वरूप बदलता रहा।