Chapter 3
“लिखित सम्प्रेषण – अनौपचारिक/पारिवारिक पत्र-लेखन”
अति-लघु उत्तरीय प्रश्न) :
प्रश्न 1: लिखित सम्प्रेषण का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब विचारों, भावों और सूचनाओं का आदान-प्रदान लिखित शब्दों या लिपिबद्ध भाषा के माध्यम से किया जाता है, तो उसे लिखित सम्प्रेषण कहते हैं।
प्रश्न 2: अनौपचारिक पत्र किन्हें लिखे जाते हैं? [2025]
उत्तर: अनौपचारिक पत्र परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, मित्रों तथा निकट संबंधियों को लिखे जाते हैं।
प्रश्न 3: संपादक के नाम पत्र किस श्रेणी के पत्र-लेखन के अंतर्गत आता है?
उत्तर: यह औपचारिक/सार्वजनिक पत्र-लेखन के अंतर्गत आता है।
प्रश्न 4: औपचारिक पत्र में विषय (Subject) का उल्लेख करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: विषय से पत्र का मुख्य उद्देश्य और संदर्भ एक ही दृष्टि में स्पष्ट हो जाता है।
प्रश्न 5: अनौपचारिक पत्र में अपने से बड़ों के लिए किस अभिवादन शब्द का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: ‘सादर प्रणाम’ अथवा ‘चरण स्पर्श’।
प्रश्न 6: अनुच्छेद-लेखन में सामान्यतः कितने विचारों या भावों को प्रस्तुत किया जाता है?
उत्तर: अनुच्छेद-लेखन में केवल एक ही केंद्रीय विचार या विषय-बिंदु को संक्षेप में विकसित किया जाता है।
प्रश्न 7: ‘निबंध’ शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: ‘निबंध’ (नि + बंध) का शाब्दिक अर्थ है— विचारों को व्यवस्थित अथवा भली-भाँति बाँधना।
प्रश्न 8: संवाद-लेखन में भाषा कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: संवाद-लेखन की भाषा पात्रानुकूल, सरल, स्वाभाविक तथा बोलचाल की होनी चाहिए।
प्रश्न 9: आवेदन-पत्र (Application) के समापन में प्रेषक के लिए सामान्यतः किन शब्दों का प्रयोग होता है?
उत्तर: ‘भवदीय’, ‘प्रार्थी’, अथवा ‘आज्ञाकारी शिष्य/शिष्या’।
प्रश्न 10: अनौपचारिक पत्र में प्रेषक का पता किस ओर लिखा जाता है?
उत्तर: आधुनिक मानक प्रारूप के अनुसार प्रेषक का पता पृष्ठ के बाएँ कोने में सबसे ऊपर लिखा जाता है।
प्रश्न 11: संपादक के नाम पत्र लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: किसी जनसमस्या, सामाजिक विसंगति अथवा महत्वपूर्ण विषय पर जनमानस और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना।
प्रश्न 12: संवाद-लेखन में कथोपकथन को प्रभावशाली बनाने के लिए किन चिन्हों का समुचित प्रयोग अनिवार्य है?
उत्तर: विराम-चिन्हों (यथा अल्पविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक तथा विस्मयादिबोधक चिन्ह)।
प्रश्न 13: निबंध के मुख्य रूप से कितने अंग होते हैं?
उत्तर: तीन अंग होते हैं— प्रस्तावना (भूमिका), मध्य भाग (विषय-विस्तार), और उपसंहार (निष्कर्ष)।
प्रश्न 14: पत्र-लेखन में ‘प्रति’ या ‘सेवा में’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त होता है?
उत्तर: पत्र प्राप्तकर्ता (अधिकारी/संपादक/व्यक्ति) को संबोधित करने के लिए।
प्रश्न 15: अनुच्छेद और निबंध में मूलभूत अंतर क्या है?
उत्तर: अनुच्छेद एक स्वतंत्र, संक्षिप्त विचार-खंड होता है, जबकि निबंध विस्तृत, बहु-अनुच्छेदीय और विश्लेषणात्मक रचना होती है।
50 शब्दों वाले प्रश्नोत्तर (15 लघु उत्तरीय प्रश्न):
प्रश्न 1: अनौपचारिक पत्र की किन्हीं दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2025]
उत्तर:
- आत्मीयता एवं सहजता: इसमें औपचारिकता या नियमों की बाध्यता नहीं होती, बल्कि निजी भावनाओं और आत्मीय भाषा को प्रमुखता दी जाती है।
- सरल व स्वाभाविक शैली: इसमें कृत्रिमता के स्थान पर व्यावहारिक और बातचीत जैसी सहज शैली का प्रयोग होता है।
प्रश्न 2: लिखित सम्प्रेषण का व्यावहारिक जीवन में क्या महत्त्व है?
उत्तर: लिखित सम्प्रेषण स्थायी एवं प्रामाणिक दस्तावेज का कार्य करता है। यह कानूनी संदर्भों, व्यावसायिक अनुमतियों तथा प्रशासनिक कार्यों में अकाट्य साक्ष्य (Proof) के रूप में सुरक्षित रहता है। साथ ही, यह भौगोलिक सीमाओं से परे स्पष्ट और त्रुटिरहित संदेश संप्रेषित करने का सबसे विश्वसनीय माध्यम है।
प्रश्न 3: संपादक के नाम लिखे जाने वाले पत्र का प्रारूप क्या होता है?
उत्तर:
- बाईं ओर ‘सेवा में’, संपादक, समाचार पत्र का नाम व शहर का उल्लेख।
- संक्षिप्त और स्पष्ट ‘विषय’।
- ‘महोदय’ संबोधन के साथ समाचार पत्र के माध्यम से संबंधित समस्या का संक्षिप्त विवरण।
- समस्या के समाधान हेतु सक्षम अधिकारियों से अपील और अंत में ‘भवदीय’ लिखकर नाम व पता।
प्रश्न 4: अनुच्छेद-लेखन करते समय किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए? [2025]
उत्तर: अनुच्छेद-लेखन में अनावश्यक विस्तार, पुनरावृत्ति और विषय से भटकाव से बचना चाहिए। पूरे अनुच्छेद में एक ही मुख्य भावसूत्र होना चाहिए। वाक्य छोटे, परस्पर जुड़े हुए और भाषा व्याकरणसम्मत होनी चाहिए। इसमें भूमिका या उपसंहार अलग से नहीं लिखा जाता।
प्रश्न 5: संवाद-लेखन की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: संवाद पात्रों की उम्र, पद, स्वभाव और परिस्थिति के अनुकूल होने चाहिए। संवाद संक्षिप्त, रोचक और चुटीले होने चाहिए ताकि पाठक की रुचि बनी रहे। कोष्ठकों में भाव-भंगिमा या क्रिया-प्रतिक्रिया का संक्षिप्त संकेत (रंग-निर्देश) संवाद को अधिक जीवंत बनाता है।
प्रश्न 6: ‘डॉक्टर और रोगी’ के बीच बातचीत का एक संक्षिप्त संवाद-नमूना प्रस्तुत कीजिए। [2025]
उत्तर:
- रोगी: नमस्ते डॉक्टर साहब! कल रात से मुझे तेज़ बुखार और सिरदर्द है।
- डॉक्टर: नमस्ते! बैठिए। क्या ठंड भी लग रही है या गले में खराश है?
- रोगी: जी हाँ, बहुत कपकपी हो रही है और शरीर में दर्द है।
- डॉक्टर: चिंता न करें, यह मौसमी वायरल लग रहा है। मैं तीन दिन की दवा लिख रहा हूँ, गुनगुना पानी पिएं और आराम करें।
प्रश्न 7: औपचारिक पत्र में प्रयुक्त होने वाले संबोधन और अभिवादन के नियम स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: औपचारिक पत्रों में आदरसूचक और तटस्थ शब्दों का प्रयोग किया जाता है। संबोधन के रूप में ‘महोदय’, ‘महोदया’, या ‘मान्यवर’ का प्रयोग होता है। इनमें अनौपचारिक पत्रों की तरह ‘सादर प्रणाम’ या ‘स्नेह’ जैसे अभिवादन नहीं लिखे जाते, सीधे मुख्य विषय पर आया जाता है।
प्रश्न 8: निबंध-लेखन में ‘प्रस्तावना’ और ‘उपसंहार’ का क्या महत्व है?
उत्तर: ‘प्रस्तावना’ पाठक को विषय की पृष्ठभूमि से जोड़कर आगे पढ़ने के लिए आकर्षित करती है। वहीं ‘उपसंहार’ पूरे निबंध का सार, निष्कर्ष और लेखक का अंतिम दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिससे निबंध को एक संतुलित और सुगठित पूर्णता मिलती है।
प्रश्न 9: ‘इंटरनेट’ विषय पर एक संक्षिप्त अनुच्छेद लिखिए। [2025]
उत्तर: इंटरनेट आधुनिक युग का सर्वाधिक शक्तिशाली और अपरिहार्य संप्रेषण माध्यम बन चुका है। इसने सूचना, शिक्षा, व्यापार और मनोरंजन के क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। घर बैठे एक क्लिक पर दुनिया भर की जानकारी प्राप्त हो जाती है। जहाँ इसने जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर सुरक्षा और इसके अत्यधिक दुरुपयोग से बचना भी आवश्यक है।
प्रश्न 10: आवेदन-पत्र लिखते समय ध्यान देने योग्य तीन मुख्य बिंदु बताइए।
उत्तर:
- पत्र का उद्देश्य अत्यंत स्पष्ट और विनम्र भाषा में व्यक्त होना चाहिए।
- जिस पद, अवकाश या सुविधा की मांग की जा रही है, उसका सटीक कारण एवं विवरण हो।
- आवश्यक संलग्नक (Documents) और संपर्क जानकारी का सही स्थान पर उल्लेख हो।
प्रश्न 11: अनौपचारिक पत्र में विषय (Subject) क्यों नहीं लिखा जाता?
उत्तर: अनौपचारिक पत्र व्यक्तिगत संबंधों, कुशल-क्षेम पूछने और पारिवारिक भावनाओं के आदान-प्रदान के लिए लिखे जाते हैं। इनमें कोई प्रशासनिक या औपचारिक कार्य-प्रयोजन नहीं होता, इसलिए इनमें विषय-पंक्ति की आवश्यकता नहीं होती।
प्रश्न 12: ‘लाइब्रेरी’ (पुस्तकालय) के महत्व पर एक संक्षिप्त अनुच्छेद लिखिए। [2025]
उत्तर: पुस्तकालय ज्ञान का असीम भंडार और स्वाध्याय का पवित्र मंदिर है। यहाँ विभिन्न विषयों की दुर्लभ पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं और संदर्भ ग्रंथों का संग्रह एक ही छत के नीचे उपलब्ध रहता है। यह विद्यार्थियों में अध्ययन की आदत विकसित करता है और उनके बौद्धिक व मानसिक विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 13: विवरणात्मक और विचारात्मक निबंध में क्या अंतर है?
उत्तर: विवरणात्मक निबंध में किसी घटना, यात्रा, मेले या दृश्य का सजीव एवं क्रमिक चित्रण किया जाता है, जहाँ वर्णन की प्रधानता होती है। इसके विपरीत, विचारात्मक निबंध में किसी अमूर्त विषय, समस्या या दार्शनिक विचार पर तर्कपूर्ण, विश्लेषणात्मक और चिंतनपरक शैली में विचार रखे जाते हैं।
प्रश्न 14: नौकरी हेतु आवेदन-पत्र (Job Application) के साथ संलग्न किए जाने वाले जीवन-वृत्त (Resume/CV) की क्या भूमिका है?
उत्तर: जीवन-वृत्त अभ्यर्थी की शैक्षणिक योग्यता, कार्यानुभव, व्यक्तिगत विवरण और विशेष दक्षताओं का व्यवस्थित सार होता है। यह नियोक्ता को कम समय में प्रार्थी की उपयुक्तता का निष्पक्ष आकलन करने में मदद करता है।
प्रश्न 15: संवाद-लेखन में स्वाभाविकता बनाए रखने के क्या उपाय हैं?
उत्तर: संवादों में किताबी भाषा के स्थान पर सहज बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। पात्रों के स्वभाव के अनुसार छोटे-छोटे प्रश्नोत्तर और उपयुक्त विराम-चिन्हों का प्रयोग स्वाभाविकता लाता है, जिससे संवाद कृत्रिम या बोझिल नहीं लगते।
200 शब्दों वाले प्रश्नोत्तर (10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न):
प्रश्न 1: अपने मोहल्ले में बढ़ती चोरियों की शिकायत करते हुए स्थानीय थाना प्रभारी (थानेदार) को एक आवेदन/शिकायत पत्र लिखिए। [2025]
उत्तर:
सेवा में,
थाना प्रभारी महोदय,
जालुकबारी थाना, गुवाहाटी।
विषय: मोहल्ले में बढ़ती चोरी की घटनाओं की रोकथाम हेतु शिकायत-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपका ध्यान हमारे क्षेत्र ‘शांति नगर, जालुकबारी’ में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।
विगत पंद्रह दिनों के भीतर मोहल्ले में चार घरों के ताले तोड़े जा चुके हैं तथा रात्रि के समय खड़ी दोपहिया वाहनों की चोरी की घटनाएँ भी सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण पूरे क्षेत्र के निवासियों में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं। मोहल्ले में कुछ संदिग्ध युवकों का देर रात तक जमावड़ा देखा गया है, जिसकी पूर्व में भी मौखिक सूचना दी गई थी।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि हमारे क्षेत्र में रात्रि के समय पुलिस गश्त (Patrolling) बढ़ाई जाए तथा इन आपराधिक गतिविधियों में लिप्त असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि स्थानीय नागरिक भयमुक्त जीवन जी सकें। आपके इस त्वरित सहयोग के लिए हम सभी क्षेत्रवासी आपके आभारी रहेंगे।
सधन्यवाद।
भवदीय,
रमेश कुमार शर्मा
(समस्त निवासी, शांति नगर, जालुकबारी)
दिनांक: 16 अगस्त 2026
प्रश्न 2: निबंध-लेखन की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसके प्रमुख प्रकारों और रचना-प्रक्रिया पर विस्तृत प्रकाश डालिए।
उत्तर: अवधारणा: ‘निबंध’ आधुनिक गद्य की वह महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें लेखक किसी विषय पर अपने विचारों, अनुभवों और ज्ञान को सीमित कलेवर में सुगठित, तर्कसंगत और प्रवाहपूर्ण रूप से प्रस्तुत करता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, “यदि गद्य कवियों की कसौटी है, तो निबंध गद्य की कसौटी है।”
निबंध के प्रमुख प्रकार:
- वर्णनात्मक निबंध: इनमें किसी स्थान, वस्तु, ऋतु या दृश्य का यथार्थ वर्णन होता है (जैसे— ‘असम के चाय बागान’)।
- विवरणात्मक निबंध: इनमें ऐतिहासिक घटनाओं, यात्राओं या जीवन-चरित्र का क्रमिक विवरण दिया जाता है (जैसे— ‘मेरी काजीरंगा यात्रा’)।
- विचारात्मक निबंध: ये गंभीर, दार्शनिक और सामाजिक समस्याओं पर आधारित होते हैं, जिनमें तर्क और चिंतन की प्रधानता होती है (जैसे— ‘साहित्य और समाज’)।
- भावात्मक निबंध: इनमें बुद्धि के स्थान पर हृदय के भावों, कल्पना और संवेदना की प्रमुखता होती है।
रचना-प्रक्रिया:
- प्रस्तावना: विषय का संक्षिप्त एवं आकर्षक परिचय देकर पाठक की जिज्ञासा जागृत करना।
- विषय-विस्तार (मध्य भाग): विषय के विभिन्न आयामों, पक्ष-विपक्ष और तथ्यों को तार्किक अनुच्छेदों में विभाजित कर प्रस्तुत करना।
- उपसंहार: पूरे विचार-विमर्श का संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए सकारात्मक दिशा देना।
प्रश्न 3: किसी प्रतिष्ठित दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखकर अपने शहर में अनियंत्रित यातायात (Traffic Jam) एवं उससे उत्पन्न समस्याओं की ओर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कीजिए।
उत्तर:
सेवा में,
मुख्य संपादक,
दैनिक असम वाणी, गुवाहाटी।
विषय: शहर में अनियंत्रित यातायात व्यवस्था और जाम की समस्या के समाधान हेतु।
महोदय,
मैं आपके प्रतिष्ठित और लोकप्रिय दैनिक समाचार-पत्र के माध्यम से गुवाहाटी महानगर में दिन-प्रतिदिन विकराल रूप लेती जा रही अनियंत्रित यातायात (ट्रैफिक जाम) की समस्या की ओर नगर प्रशासन और यातायात विभाग का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।
वर्तमान समय में नगर के प्रमुख मार्गों— जीएस रोड, पलटन बाज़ार और मालिगांव में यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। सुबह कार्यालय और विद्यालय के समय तथा शाम को व्यस्ततम घंटों में घंटों लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। सड़कों पर अवैध पार्किंग, फुटपाथों पर अतिक्रमण और यातायात नियमों की निरंतर अनदेखी इस समस्या को और बढ़ा रही है। इसके कारण समय और ईंधन की भारी बर्बादी हो रही है, एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएँ भी जाम में फँस जाती हैं तथा ध्वनि व वायु प्रदूषण से नागरिकों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
अतः मेरा प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से सादर अनुरोध है कि प्रमुख चौराहों पर ट्रैफ़िक सिग्नलों को सुधारा जाए, अवैध पार्किंग पर सख्त चालान किए जाएँ और सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए। आशा है कि आप जनहित के इस गंभीर मुद्दे को अपने पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।
भवदीय,
विकास बरुआ
गुवाहाटी, असम
दिनांक: 16 अगस्त 2026
प्रश्न 4: अनुच्छेद-लेखन की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए तथा यह निबंध-लेखन से किस प्रकार भिन्न है? [2025]
उत्तर:
अनुच्छेद-लेखन की प्रमुख विशेषताएँ:
- एकसूत्रता व केंद्रीयता: अनुच्छेद में किसी एक विचार या घटना का ही वर्णन होता है। इसमें विषय से इतर कोई बात नहीं कही जाती।
- संक्षिप्तता एवं कसावट: यह आकार में सीमित (लगभग 80 से 120 शब्द) होता है। भाषा में शब्द-चयन सटीक और कसा हुआ होना अनिवार्य है।
- प्रवाह और तारतम्यता: सभी वाक्य एक-दूसरे से शृंखलाबद्ध रूप में जुड़े होते हैं। पहले वाक्य से अंतिम वाक्य तक विचार का स्वाभाविक प्रवाह रहता है।
- सरल व सुबोध भाषा: क्लिष्टता और मुहावरेदार अतिरंजना से बचते हुए सीधे मुख्य बिंदु पर बात रखी जाती है।
अनुच्छेद और निबंध में अंतर:
| बिंदु | अनुच्छेद-लेखन | निबंध-लेखन |
| आकार | संक्षिप्त (एक ही पैराग्राफ) | विस्तृत और बहु-अनुच्छेदीय |
| संरचना | प्रस्तावना व उपसंहार अलग से नहीं होते | प्रस्तावना, विस्तार और उपसंहार की स्पष्ट रूपरेखा होती है |
| विचार-विस्तार | केवल एक केंद्रीय विचार पर ध्यान | विषय के विभिन्न आयामों व पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण |
संक्षेप में, यदि निबंध एक विशाल वृक्ष है तो अनुच्छेद उसकी एक हरी-भरी टहनी के समान है।
प्रश्न 5: अनौपचारिक पत्र-लेखन के विभिन्न अंगों का विस्तृत विवरण देते हुए अपने छोटे भाई को कुसंगति से दूर रहने और अध्ययन पर ध्यान देने हेतु एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
अनौपचारिक पत्र के प्रमुख अंग:
- प्रेषक का पता व दिनांक (शीर्ष पर बाईं ओर)।
- संबंधानुसार संबोधन (जैसे— प्रिय, पूज्य)।
- यथायोग्य अभिवादन (जैसे— सप्रेम नमस्ते, सादर प्रणाम)।
- कुशल-क्षेम एवं मुख्य संदेश (मध्य भाग)।
- प्रेषक का संबंध व नाम (समापन)।
पत्र-नमूना:
छात्रावास कक्ष क्र. 12,
कॉटन यूनिवर्सिटी परिसर, गुवाहाटी
दिनांक: 16 अगस्त 2026
प्रिय अनुज राहुल,
सप्रेम शुभाशीष।
हम सब यहाँ सकुशल हैं और ईश्वर से तुम्हारी कुशलता की कामना करते हैं। कल ही मुझे पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ, जिससे ज्ञात हुआ कि इस बार की छमाही परीक्षा में तुम्हारे अंक काफी कम आए हैं। साथ ही यह भी पता चला कि तुम पढ़ाई छोड़कर व्यर्थ की मित्र-मंडली में अधिक समय बिता रहे हो।
प्रिय राहुल, विद्यार्थी जीवन मानव जीवन की आधारशिला है। इस उम्र में अच्छी और बुरी संगति का प्रभाव हमारे पूरे भविष्य को तय करता है। कुसंगति उस कोयले के समान होती है जो गर्म होने पर हाथ जलाती है और ठंडी होने पर हाथ काले करती है। गलत मित्रों के साथ समय नष्ट करने से न केवल समय और ऊर्जा का अपव्यय होता है, बल्कि हमारे संस्कार और लक्ष्य भी धूमिल हो जाते हैं।
तुम अत्यंत प्रतिभाशाली और समझदार हो। परिवार को तुमसे बहुत आशाएँ हैं। मेरी सलाह है कि तुरंत ऐसे मित्रों का साथ छोड़ो जो तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य से भटकाते हैं। नियमित रूप से स्वाध्याय करो और समय का सदुपयोग करो। मुझे पूर्ण विश्वास है कि तुम अपनी भूल सुधारकर आगामी वार्षिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करोगे।
माताजी और पिताजी को मेरा सादर प्रणाम कहना।
तुम्हारा अग्रज,
आलोक
प्रश्न 6: संवाद-लेखन के सैद्धांतिक नियमों पर प्रकाश डालते हुए ‘ऑनलाइन शिक्षा के गुण और दोष’ विषय पर दो सहपाठियों के बीच संवाद तैयार कीजिए।
उत्तर:
संवाद-लेखन के सैद्धांतिक नियम:
- संवाद विषय के अनुकूल और स्वाभाविक होने चाहिए।
- भाषा पात्र के स्वभाव, परिवेश और बौद्धिक स्तर के अनुरूप हो।
- संवाद छोटे, अर्थपूर्ण और रोचक हों; लंबे भाषणों से बचना चाहिए।
- मनोभावों (हँसी, आश्चर्य, क्रोध) को दर्शाने हेतु कोष्ठक का समुचित प्रयोग हो।
संवाद:
(स्थान: कॉलेज का पुस्तकालय प्रांगण। रोहन और समीर बैठे हैं।)
- रोहन: अरे समीर! कल तुम प्रोफ़ेसर साहब के ऑनलाइन व्याख्यान में उपस्थित नहीं थे?
- समीर: हाँ रोहन, मेरे क्षेत्र में कल नेटवर्क की भारी समस्या थी। सच कहूँ तो मुझे पारंपरिक कक्षा में बैठकर पढ़ना ही अधिक पसंद आता है।
- रोहन: तुम्हारी बात कुछ हद तक सही है, लेकिन ऑनलाइन शिक्षा की अपनी सुविधाएँ भी हैं। हम घर बैठे देश-विदेश के श्रेष्ठ विद्वानों के व्याख्यान सुन सकते हैं और रिकॉर्डेड क्लास को कभी भी दोहरा सकते हैं।
- समीर: (सहमति जताते हुए) सुविधा तो है, पर दिनभर मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन देखने से आँखों पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा कक्षा जैसा जीवंत माहौल, सहपाठियों से संवाद और अनुशासन ऑनलाइन में कहाँ मिल पाता है?
- रोहन: बिल्कुल ठीक कह रहे हो। तकनीकी गड़बड़ी और डिजिटल लत इसके बड़े दोष हैं। पर यदि इसका संतुलित उपयोग किया जाए, तो यह ज्ञानार्जन का बेहतरीन साधन है।
- समीर: सही कहा। तकनीक साधन बने, साध्य नहीं। चलिए, अब लाइब्रेरी चलकर अगली कक्षा की तैयारी करते हैं।
प्रश्न 7: किसी विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखकर अपने विद्यालय में खेल-सामग्री की समुचित व्यवस्था कराने एवं खेल का मैदान विकसित करने हेतु आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
केंद्रीय विद्यालय, खानापाड़ा, गुवाहाटी।
विषय: खेल-सामग्री की व्यवस्था तथा खेल मैदान के विकास हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा बारहवीं ‘अ’ का छात्र प्रतिनिधि (Sports Secretary) हूँ। मैं विद्यालय के समस्त विद्यार्थियों की ओर से खेल सुविधाओं के संदर्भ में आपका ध्यान एक आवश्यक विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
हमारे विद्यालय के छात्र-छात्राएँ सदैव से खेलकूद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते रहे हैं। आगामी अंतर-विद्यालयीन खेल प्रतियोगिता भी अगले माह आयोजित होने वाली है। किंतु अत्यंत खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे विद्यालय के खेल कक्ष में फुटबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन रैकेट और क्रिकेट किट जैसी बुनियादी सामग्रियां या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, वर्षा ऋतु के कारण खेल मैदान में जगह-जगह घास और जलभराव हो गया है, जिससे अभ्यास करने में भारी असुविधा हो रही है।
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। खेलकूद विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का अनिवार्य अंग हैं।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि खेल कोष से नई खेल-सामग्रियों की शीघ्र खरीद करवाने तथा विद्यालय के मैदान की समुचित सफाई व मरम्मत कराने की कृपा करें, ताकि हम सभी विद्यार्थी लगन से अभ्यास कर आगामी प्रतियोगिताओं में विद्यालय का नाम रोशन कर सकें।
सधन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
मनोज दास
(क्रीड़ा सचिव)
कक्षा: 12वीं ‘अ’
दिनांक: 16 अगस्त 2026
प्रश्न 8: ‘प्रदूषण की समस्या और समाधान’ अथवा ‘असम में बाढ़ की समस्या’ विषय पर लगभग 200 शब्दों में एक सारगर्भित निबंध लिखिए।
उत्तर:
विषय: असम में बाढ़ की समस्या: कारण और समाधान
प्रस्तावना:
असम की प्राकृतिक सुषमा और उर्वरता में ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों का अमूल्य योगदान है। किंतु प्रतिवर्ष मानसून के आगमन के साथ ही यह वरदान ‘बाढ़’ के रूप में एक भयानक अभिशाप बन जाता है। बाढ़ असम की केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक त्रासदी है।
बाढ़ के मुख्य कारण:
असम में बाढ़ के प्रमुख कारणों में मानसूनी वर्षा की अधिकता, पड़ोसी पहाड़ी राज्यों से आने वाला भारी जलप्रवाह तथा ब्रह्मपुत्र नदी के तल में अत्यधिक गाद (Siltation) का जमा होना है। गाद जमने से नदी की गहराई कम हो गई है, जिससे अतिरिक्त पानी किनारों को तोड़कर रिहायशी इलाकों और खेतों में फैल जाता है। इसके अलावा अनियंत्रित वनों की कटाई और तटबंधों का पुराना व कमजोर होना भी इस समस्या को गंभीर बनाता है।
दुष्परिणाम:
बाढ़ से लाखों लोग बेघर हो जाते हैं, व्यापक पैमाने पर खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं और पशुधन की अपूरणीय क्षति होती है। विश्वप्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के वन्यजीवों को भारी संकट का सामना करना पड़ता है। महामारी और मिट्टी का कटाव (Erosion) राज्य की अर्थव्यवस्था को दशकों पीछे धकेल देता है।
समाधान एवं निष्कर्ष:
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों में ड्रेजिंग (गाद निकासी) कर उनकी गहराई बढ़ाई जानी चाहिए। तटबंधों को आधुनिक तकनीक से पक्का और सुदृढ़ करना अनिवार्य है। वनीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ पूर्व चेतावनी प्रणाली को सशक्त करना होगा। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित और दीर्घकालिक प्रयासों से ही असम को इस वार्षिक विभीषिका से मुक्ति मिल सकती है।
प्रश्न 9: लिखित सम्प्रेषण और मौखिक सम्प्रेषण का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए आधुनिक कार्यालयी कामकाज में लिखित सम्प्रेषण की अपरिहार्यता सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
सम्प्रेषण मानव समाज की आधारशिला है। विचारों के संप्रेषण के मुख्य रूप से दो रूप हैं— मौखिक और लिखित। दोनों की अपनी विशिष्टताएँ और सीमाएँ हैं।
तुलनात्मक अंतर:
- स्थायित्व एवं साक्ष्य: मौखिक सम्प्रेषण तात्कालिक और क्षणिक होता है, जिसका कोई स्थायी लिखित प्रमाण नहीं होता। इसके विपरीत, लिखित सम्प्रेषण स्थायी होता है और इसे भविष्य के लिए कानूनी या आधिकारिक साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।
- स्पष्टता एवं उत्तरदायित्व: लिखित सम्प्रेषण सोच-समझकर, व्याकरणसम्मत और सुगठित रूप में तैयार किया जाता है, जिससे इसमें भ्रांति की गुंजाइश कम होती है और प्रेषक का उत्तरदायित्व सुनिश्चित होता है। मौखिक सम्प्रेषण में भावुकता या अस्पष्टता की संभावना अधिक रहती है।
- भौगोलिक दूरी: मौखिक सम्प्रेषण में आमने-सामने होना या तात्कालिक माध्यम जरूरी है, जबकि लिखित सम्प्रेषण पत्रों, आदेशों, और ई-मेल द्वारा दूरस्थ स्थानों पर भी समान प्रामाणिकता से भेजा जा सकता है।
कार्यालयी कामकाज में अपरिहार्यता:
आधुनिक प्रशासनिक व व्यावसायिक व्यवस्था पूर्णतः लिखित सम्प्रेषण पर टिकी है। सरकारी नीतियां, नियम, अनुबंध (Contracts), वित्तीय लेनदेन, परिपत्र (Circulars) और आदेश बिना लिखित रूप के लागू नहीं किए जा सकते। यह कार्यों में पारदर्शिता, निरंतरता और उत्तरदायित्व बनाए रखने का एकमात्र माध्यम है।
प्रश्न 10: ‘नौकरी के लिए साक्षात्कार (Interview)’ के आरंभ में अभ्यर्थी और साक्षात्कारकर्ता के बीच होने वाले वार्तालाप का एक प्रामाणिक संवाद-नमूना तैयार कीजिए। [2025]
उत्तर:
(स्थान: साक्षात्कार कक्ष। साक्षात्कार बोर्ड के अध्यक्ष और दो सदस्य बैठे हैं। अभ्यर्थी दरवाजे पर दस्तक देता है।)
- अभ्यर्थी: सादर प्रणाम सर! क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?
- साक्षात्कारकर्ता (अध्यक्ष): (मुस्कुराते हुए) सादर प्रणाम! जी आइए, बैठिए।
- अभ्यर्थी: धन्यवाद सर! (कुर्सी पर शालीनता से बैठते हुए)
- साक्षात्कारकर्ता: आपका नाम देवाशीष शर्मा है न? अपने बारे में कुछ बताइए, जिससे आपकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रुचियों का पता चल सके।
- अभ्यर्थी: जी सर। मेरा नाम देवाशीष शर्मा है। मैंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्रथम श्रेणी में प्राप्त की है। अध्ययन के दौरान मैंने भाषा-प्रौद्योगिकी और रचनात्मक लेखन में विशेष रुचि ली है। इसके अतिरिक्त, मुझे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेना और जनसंचार माध्यमों के लिए लेख लिखना पसंद है।
- साक्षात्कारकर्ता (सदस्य 1): बहुत अच्छा देवाशीष! आपकी अंकतालिका बताती है कि भाषा पर आपकी पकड़ अच्छी है। आप हमारी संस्था में इस अनुवादक और सम्प्रेषण अधिकारी के पद पर कार्य करने के लिए स्वयं को कितना उपयुक्त मानते हैं?
- अभ्यर्थी: सर, मेरी शैक्षणिक योग्यता, द्विभाषी दक्षता (असमिया/हिंदी/अंग्रेजी) और निरंतर सीखने का उत्साह मुझे इस पद के दायित्वों को पूरी निष्ठा व समयबद्धता से निभाने में सक्षम बनाते हैं।
- साक्षात्कारकर्ता (अध्यक्ष): उत्तम! चलिए, अब कुछ विषयगत और समसामयिक प्रश्नों पर चर्चा करते हैं…
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