Chapter 4
“पठन-श्रवण (केवल आंतरिक परीक्षण के लिए)”
अति-लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (1 अंक – 15 प्रश्न) :
1. ‘अंगूठा दिखाना’ मुहावरे का क्या अर्थ है? [2025]
उत्तर: ठीक समय पर किसी काम के लिए साफ़ इनकार कर देना।
2. ‘दूध का दूध पानी का पानी’ लोकोक्ति का क्या तात्पर्य है? [2025]
उत्तर: बिना किसी पक्षपात के निष्पक्ष और सच्चा न्याय करना।
3. ‘मातृभूमि’ कविता के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त।
4. ‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता में पुष्प देवों के सिर पर चढ़कर क्या नहीं करना चाहता?
उत्तर: पुष्प देवों के सिर पर चढ़कर अपने भाग्य पर इठलाना नहीं चाहता।
5. ‘झाँसी की रानी’ कविता की रचनाकार कौन हैं?
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान।
6. ‘जनतंत्र का जन्म’ कविता में कवि दिनकर के अनुसार असली शासक कौन बनने जा रहा है?
उत्तर: वर्षों से शोषित और उपेक्षित जनता (प्रजा)।
7. ‘दो बैलों की कथा’ कहानी के मुख्य पात्र दोनों बैलों के नाम क्या हैं?
उत्तर: हीरा और मोती (लेखक: मुंशी प्रेमचंद)।
8. ‘अशोक के फूल’ किस विधा की रचना है और इसके लेखक कौन हैं?
उत्तर: यह आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक ललित निबंध है।
9. संक्षेपण का मूल नियम क्या है? [2025]
उत्तर: मूल पाठ के मुख्य भाव को सुरक्षित रखते हुए उसे लगभग एक-तिहाई (1/3) शब्दों में संक्षिप्त रूप से लिखना।
10. ‘पल्लवन’ से क्या तात्पर्य है? [2025]
उत्तर: किसी सुगठित, संक्षिप्त सूत्र, सूक्ति अथवा विचार-बिंदु का तार्किक और विस्तृत भाव-विस्तार करना।
11. ‘आँखें खुलना’ मुहावरे का सही अर्थ क्या है? [2025]
उत्तर: वास्तविकता का ज्ञान होना या भ्रम दूर होकर सचेत होना।
12. ‘पहाड़ टूट पड़ना’ मुहावरे का क्या अर्थ है? [2025]
उत्तर: अचानक अत्यधिक भारी विपत्ति या भारी संकट आ पड़ना।
13. ‘उन्नीस-बीस होना’ मुहावरे का अर्थ बताइए। [2025]
उत्तर: बहुत कम अथवा नगण्य अंतर होना।
14. ‘दो बैलों की कथा’ में गया कौन था?
उत्तर: झूरी का साला, जो दोनों बैलों को अपने घर काम कराने के लिए ले गया था।
15. ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ यह पंक्ति किस कविता की है?
उत्तर: रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता ‘जनतंत्र का जन्म’ की।
खंड 2: लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (लगभग 50 शब्द – 15 प्रश्न)
1. संक्षेपण करते समय किन मुख्य बातों का ध्यान रखना चाहिए? [2025] उत्तर: संक्षेपण करते समय मूल पाठ को दो-तीन बार ध्यानपूर्वक पढ़कर मुख्य विचार को रेखांकित करना चाहिए। अनावश्यक उदाहरण, व्याख्या, मुहावरे और पुनरुक्ति को हटा देना चाहिए। संक्षेपण सदैव अन्य पुरुष में, सरल भाषा में तथा मूल सामग्री के लगभग एक-तिहाई भाग में लिखा जाना चाहिए।
2. पल्लवन की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। [2025]
उत्तर: पल्लवन किसी सूक्ति, कहावत या बीज-विचार का विस्तार है। इसमें मूल विचार की गहराई को विश्लेषित कर तार्किक दृष्टिकोण से स्पष्ट किया जाता है। भाषा प्रवाहपूर्ण, शुद्ध और प्रासंगिक होनी चाहिए। इसमें टीका-टिप्पणी या आलोचना के स्थान पर केवल केंद्रीय भाव का विस्तार किया जाता है।
3. ‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता का मूल संदेश क्या है?
उत्तर: माखनलाल चतुर्वेदी कृत ‘पुष्प की अभिलाषा’ देशप्रेम और आत्म-उत्सर्ग की भावना से ओतप्रोत है। पुष्प किसी सुंदरी के गहनों या देव-प्रतिमा पर चढ़ने के बजाय उस पथ पर बिखरना चाहता है जिस पर मातृभूमि की रक्षा के लिए वीर सैनिक अपना शीश चढ़ाने जाते हैं।
4. ‘मातृभूमि’ कविता में कवि मैथिलीशरण गुप्त ने प्रकृति और देश का कैसा चित्र खींचा है?
उत्तर: कवि ने भारतभूमि के प्राकृतिक सौंदर्य को दिव्य रूप में चित्रित किया है। नीला आकाश उसका वस्त्र है, सूर्य और चंद्रमा मुकुट हैं, समुद्र करधनी है और नदियाँ प्रेम-प्रवाह हैं। कवि इसे ईश्वर की साक्षात सगुण मूर्ति मानकर इसके प्रति अगाध श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
5. ‘झाँसी की रानी’ कविता का ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व क्या है?
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना लक्ष्मीबाई के शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान का जीवंत वर्णन करती है। ओजस्वी वीर रस में रचित यह कविता देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना और नारी सशक्तिकरण का भाव जाग्रत करती है।
6. ‘जनतंत्र का जन्म’ कविता में ‘मिट्टी की अबोध मूरतों’ का क्या आशय है?
उत्तर: दिनकर जी ने भारत की उस मूक, परिश्रमी और शोषित आम जनता (मजदूरों-किसानों) को ‘मिट्टी की अबोध मूरतें’ कहा है, जिन्होंने सदियों तक चुपचाप अत्याचार सहे। अब वही जनता जाग चुकी है और जनतंत्र की वास्तविक सत्ता उसी के हाथों में आ रही है।
7. ‘दो बैलों की कथा’ में हीरा और मोती की मित्रता की क्या विशेषता है?
उत्तर: हीरा और मोती के बीच मूक भाषा में गहरा भावनात्मक लगाव था। दोनों एक-दूसरे की भावना समझते थे, हल में जुतते समय भारी बोझ स्वयं उठाने का प्रयास करते थे और संकट के समय कभी एक-दूसरे को अकेला नहीं छोड़ते थे, जैसा कि कांजीहौस में देखा गया।
8. ‘अशोक के फूल’ निबंध के माध्यम से हजारी प्रसाद द्विवेदी क्या प्रतिपादित करते हैं?
उत्तर: द्विवेदी जी बताते हैं कि भारतीय संस्कृति किसी एक जाति की देन नहीं, बल्कि विभिन्न जातियों (आर्य, द्रविड़, यक्ष, गंधर्व, शक, हूण) के ऐतिहासिक समन्वय का परिणाम है। समय के साथ मनुष्य ने पुरानी मान्यताओं को भुला दिया, परंतु प्रकृति का सौंदर्य और जीवन-प्रवाह निरंतर चला आ रहा है।
9. अपठित गद्यांश को हल करते समय किन चरणों का पालन करना चाहिए? [2025]
उत्तर: सर्वप्रथम गद्यांश को दो बार एकाग्रता से पढ़कर उसका मुख्य भाव समझना चाहिए। फिर प्रश्नों को पढ़कर उनके उत्तर गद्यांश में चिह्नित करने चाहिए। उत्तर अपनी सरल, स्पष्ट भाषा में देने चाहिए, गद्यांश की पंक्तियों को सीधे कॉपी नहीं करना चाहिए। शीर्षक संक्षिप्त व सटीक होना चाहिए।
10. ‘दूध का दूध पानी का पानी’ लोकोक्ति का वाक्य में सार्थक प्रयोग कीजिए। [2025]
उत्तर: अर्थ: निष्पक्ष और सही न्याय करना।
वाक्य प्रयोग: जब मामला न्यायाधीश के सामने पहुँचा, तो उन्होंने सभी गवाहों और साक्ष्यों की बारीकी से जाँच करके दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया, जिससे निर्दोष युवक रिहा हो गया।
11. मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मुहावरा एक वाक्यांश (Phrase) होता है जिसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता, बल्कि वह वाक्य के बीच में क्रिया के अनुसार बदलता है (जैसे— नौ दो ग्यारह होना)। लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य (Proverb) होती है, जो समाज के लोक-अनुभव पर आधारित होती है और स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होती है।
12. ‘अंधे की लाठी होना’ मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग लिखिए।
उत्तर: अर्थ: एकमात्र सहारा होना।
वाक्य प्रयोग: श्रवण कुमार अपने वृद्ध और नेत्रहीन माता-पिता के लिए अंधे की लाठी के समान था, जिसकी असमय मृत्यु ने उनका सब कुछ छीन लिया।
13. ‘दो बैलों की कथा’ में पशुओं और मानव की संवेदनशीलता की तुलना कैसे की गई है?
उत्तर: प्रेमचंद जी ने दर्शाया है कि पशु भी प्रेम और स्नेह की भाषा समझते हैं। झूरी का बैलों के प्रति ममत्व था, जबकि गया का व्यवहार क्रूरतापूर्ण था। गया की सौतेली बेटी द्वारा दी गई रोटी बैलों के आत्मसम्मान और भूख दोनों को तृप्त करती है।
14. ‘अशोक के फूल’ में अशोक वृक्ष के ऐतिहासिक महत्व का लोप कैसे हुआ?
उत्तर: द्विवेदी जी के अनुसार, सामंती युग में अशोक का पुष्प विलासिता, कामोत्सव और राजमहलों के आमोद-प्रमोद का मुख्य प्रतीक था। सामंतवाद के पतन और बौद्ध-संस्कृति के ह्रास के साथ ही समाज की रुचि बदल गई और लोगों ने अशोक को भुला दिया।
15. ‘जनतंत्र का जन्म’ कविता की मुख्य भाषा-शैली क्या है?
उत्तर: दिनकर जी ने ओजस्वी, उद्घोषणात्मक और प्रतीकात्मक भाषा-शैली का प्रयोग किया है। तत्सम शब्दों के साथ नाद-सौंदर्य और लयबद्ध पंक्तियों का समावेश है, जो पाठक के मन में क्रांति, उत्साह और जनचेतना का गहरा संचार करती हैं।
खंड 3: दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (लगभग 200 शब्द – 10 प्रश्न)
1. संक्षेपण के आवश्यक गुणों और नियमों की सविस्तार विवेचना कीजिए। [2025]
उत्तर: संक्षेपण कार्यालयी एवं व्यावहारिक लेखन का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसका उद्देश्य विस्तृत सामग्री को कम से कम शब्दों में उसके सार-तत्व के साथ प्रस्तुत करना होता है। एक आदर्श संक्षेपण में निम्नलिखित गुण अनिवार्य हैं:
- पूर्णता एवं शुद्धता: संक्षेपण में मूल पाठ का कोई भी महत्वपूर्ण भाव या तथ्य छूटना नहीं चाहिए। अर्थ में कोई विचलन नहीं होना चाहिए।
- संक्षिप्तता: संक्षेपण सामान्यतः मूल पाठ के कुल शब्दों का एक-तिहाई (1/3) भाग होना चाहिए।
- स्पष्टता एवं सरलता: भाषा सरल, सुबोध और व्याकरण सम्मत होनी चाहिए ताकि पाठक बिना मूल पाठ पढ़े भी विषय को भली-भाँति समझ सके।
- क्रमबद्धता और प्रवाह: विचारों का प्रवाह सुगठित और व्यवस्थित होना चाहिए, जिससे वह एक स्वतंत्र और सुसंगत रचना प्रतीत हो।
- पर-पुरुष (अन्य पुरुष) का प्रयोग: संक्षेपण सदैव अन्य पुरुष शैली में लिखा जाता है। इसमें उत्तम पुरुष (‘मैं’, ‘हम’) का प्रयोग नहीं किया जाता।
- अलंकरण का निषेध: इसमें मुहावरे, लोकोक्तियाँ, दृष्टांत, उदाहरण और आलंकारिक भाषा का त्याग किया जाता है। अंत में उपयुक्त व संक्षिप्त शीर्षक देना आवश्यक होता है।
2. पल्लवन की अवधारणा स्पष्ट करते हुए इसके प्रमुख नियमों का उल्लेख कीजिए। [2025]
उत्तर: पल्लवन का शाब्दिक अर्थ है— नए पत्तों का आना या विस्तार पाना। साहित्य और भाषा-विज्ञान में किसी गंभीर, संक्षिप्त, सूत्रात्मक विचार या लोकोक्ति के आंतरिक भाव को खोलकर तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत करना ही पल्लवन कहलाता है। इसे ‘भाव-विस्तार’ भी कहते हैं।
पल्लवन के प्रमुख नियम:
- मूल भाव की पहचान: पल्लवन के लिए दी गई पंक्ति, सूक्ति या उद्धरण को बार-बार पढ़कर उसके केंद्रीय भाव और अंतर्निहित अर्थ को समझना चाहिए।
- तर्कपूर्ण विस्तार: केंद्रीय भाव के समर्थन में आवश्यक तर्क और प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए, किंतु यह ध्यान रहे कि मूल विचार की सीमा से बाहर न जाएँ।
- सरल और परिष्कृत भाषा: वाक्य छोटे, भाषा स्पष्ट, प्रवाहमयी तथा शैली गंभीर होनी चाहिए।
- व्यास शैली का प्रयोग: पल्लवन में व्यास शैली अपनाई जाती है। इसमें विचार को खोलकर समझाने पर बल दिया जाता है।
- व्यक्तिगत आक्षेप या आलोचना से बचाव: इसमें अपनी ओर से किसी की निंदा या अनावश्यक आलोचना नहीं करनी चाहिए, बल्कि विचार को सकारात्मक व निष्पक्ष रूप से स्थापित करना चाहिए।
3. ‘दो बैलों की कथा’ कहानी के माध्यम से प्रेमचंद क्या सामाजिक और राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर: मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘दो बैलों की कथा’ मात्र पशु-प्रेम की सामान्य कहानी नहीं है, बल्कि इसके भीतर स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय समाज का गहरा यथार्थ छिपा है:
- पराधीनता के विरुद्ध संघर्ष: कहानी उस समय लिखी गई थी जब भारत ब्रिटिश पराधीनता में था। हीरा और मोती का शोषण और कांजीहौस की जेल से विद्रोह कर भागना भारतीय जनता के स्वाधीनता आंदोलन का प्रतीक है।
- संगठन में शक्ति: दोनों बैल संगठित होकर सांड जैसी विशाल शक्ति को परास्त करते हैं। यह संदेश देता है कि संगठित होकर ही बड़ी से बड़ी दमनकारी सत्ता से मुक्ति पाई जा सकती है।
- मूक प्राणियों की संवेदना: कहानी पशु और मानव के बीच के आत्मिक संबंध को उजागर करती है। झूरी का निश्छल प्रेम और भैरव की बेटी की करुणा यह दिखाती है कि प्रेम सभी बंधनों से परे है।
- सीधेपन का दुष्परिणाम: प्रेमचंद आरंभ में ही कहते हैं कि अत्यधिक सीधापन और सहनशीलता (जैसे गधे का उदाहरण) समाज में अनादर का कारण बनती है। अतः अधिकारों के लिए स्वाभिमानी संघर्ष आवश्यक है।
4. ‘अशोक के फूल’ निबंध में व्यक्त आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के सांस्कृतिक दृष्टिकोण का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का ‘अशोक के फूल’ एक युगांतरकारी ललित निबंध है, जिसमें लेखक ने भारतीय संस्कृति की सामासिक और समन्वयकारी प्रकृति का गंभीर विश्लेषण किया है:
- सांस्कृतिक समन्वय का सिद्धांत: द्विवेदी जी का स्पष्ट मत है कि भारतीय संस्कृति किसी एक जाति की शुद्ध देन नहीं है। इसमें आर्य, द्रविड़, यक्ष, गंधर्व, नाग, शक, हूण और मुगलों का ऐतिहासिक योगदान है। आज जिसे हम ‘शुद्ध हिंदू रीति-नीति’ कहते हैं, वह कई संस्कृतियों के सुंदर मिश्रण का परिणाम है।
- इतिहास की परिवर्तनशीलता: लेखक बताते हैं कि काल-प्रवाह के साथ सामाजिक मूल्य बदलते हैं। कालिदास के युग में जिस अशोक के फूल का राजमहलों में उत्सव मनाया जाता था, सामंतवाद के ढहते ही वह विस्मृति के गर्त में चला गया।
- मानव जीवन-धारा की अजेयता: लेखक मनुष्य की जिजीविषा (जीने की अदम्य इच्छा) को सर्वोपरि मानते हैं। वे कहते हैं कि सब कुछ विकृत और लुप्त हो गया, परंतु मनुष्य की जीवनी-शक्ति आज भी अडिग है। यह निबंध हमें संकीर्णता त्यागकर व्यापक मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।
5. ‘जनतंत्र का जन्म’ कविता के आधार पर रामधारी सिंह दिनकर के जनवादी दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘जनतंत्र का जन्म’ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा भारत के गणतंत्र बनने के ऐतिहासिक क्षण पर रचित ओजस्वी कविता है। यह कविता शोषित और उपेक्षित जनता के अधिकार की विजय-गाथा है:
- जनता की वास्तविक सत्ता की घोषणा: कवि कहते हैं कि सदियों की ठंडी-बुझी राख में अब आग सुलग उठी है। देश का वास्तविक शासक कोई राजा या विदेशी हुकूमत नहीं, बल्कि देश के खेत-खलिहानों में पसीना बहाने वाली आम जनता है।
- शोषक वर्ग को चेतावनी: ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का शंखनाद सामंती और अत्याचारी व्यवस्था के अंत की सीधी चेतावनी है।
- श्रमिकों और कृषकों की महत्ता: दिनकर जी जनतंत्र के वास्तविक देवता राजमहलों में नहीं, बल्कि धूल, धूप और मिट्टी में पसीना बहाते हलवाहों और गिट्टी तोड़ते मजदूरों में देखते हैं।
- ओजपूर्ण काव्य-शिल्प: कविता में वीर रस, उद्घोषणात्मक शैली और तीखे प्रतीकों का प्रयोग किया गया है जो राष्ट्रीय स्वाभिमान को जाग्रत करते हैं।
6. ‘झाँसी की रानी’ कविता में व्यक्त देशप्रेम और वीरांगना लक्ष्मीबाई के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सुभद्रा कुमारी चौहान की ‘झाँसी की रानी’ वीर रस की अमर काव्य-रचना है। यह 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस को प्रस्तुत करती है:
- अद्वितीय शौर्य और रणकौशल: रानी लक्ष्मीबाई को बचपन से ही बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी से प्रेम था। युद्धभूमि में उन्होंने अकेले ही लेफ्टिनेंट वॉकर, स्मिथ और ह्यूरोज जैसी ब्रिटिश सेना का सामना किया और उन्हें परास्त किया।
- मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान: डलहौजी की ‘हड़प नीति’ के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय रानी ने स्वाधीनता के लिए युद्ध चुना और अंततः देश के लिए वीरगति प्राप्त की।
- राष्ट्रीय चेतना का शंखनाद: रानी के बलिदान ने पूरे देश में अंग्रेजों के विरुद्ध चिंगारी सुलगा दी। ‘बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी’ पंक्ति जन-जन में स्वतंत्रता की ज्योति जगाती है।
- नारी-स्वाभिमान का प्रतीक: कविता सिद्ध करती है कि भारतीय नारी केवल कोमलता की प्रतिमूर्ति नहीं, बल्कि विपत्ति पड़ने पर रणचंडी बनकर राष्ट्र की रक्षा करने में पूर्णतः सक्षम है।
7. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: [2025]
“जीवन का सबसे बड़ा कलाकार और सबसे सफल व्यक्ति वह है जो उपयुक्त चुनाव करना जानता है। चुनाव करने में तनिक भी भूल-चूक हो गई तो असफलता, पतन और हानि सुनिश्चित है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं, जैसे माता-पिता का, देश-काल का, जन्म-मृत्यु का; किंतु कुछ चुनाव हमारे अपने वश में हैं, जिन पर हमारी सफलता और असफलता निर्भर है; जैसे काम करने या न करने का चुनाव, आलस्य और परिश्रम का चुनाव और अच्छी-बुरी संगति का चुनाव। इन सब चुनावों में अच्छी-बुरी संगति का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है; क्योंकि इस चुनाव पर ही हमारा आचरण, हमारा कर्म, हमारे विचार, हमारी कर्मशैली और हमारी भाषा का स्तर निर्भर है।”
(i) चुनाव में तनिक-सी भूल हो जाने का क्या परिणाम होता है?
उत्तर: चुनाव में तनिक-सी भूल हो जाने पर व्यक्ति को असफलता, पतन और भारी हानि का सामना करना पड़ता है।
(ii) कौन-कौन से चुनाव हमारे वश में नहीं हैं? किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: माता-पिता का चुनाव और देश-काल अथवा जन्म-मृत्यु का चुनाव मनुष्य के वश में नहीं है।
(iii) सबसे महत्वपूर्ण चुनाव कौन-सा है और क्यों?
उत्तर: सबसे महत्वपूर्ण चुनाव ‘अच्छी और बुरी संगति का चुनाव’ है, क्योंकि इसी चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, कार्यशैली और भाषा का स्तर निर्भर करता है।
(iv) कौन-कौन से चुनाव मनुष्य के वश में हैं?
उत्तर: काम करने या न करने का चुनाव, आलस्य और परिश्रम का चुनाव तथा अच्छी-बुरी संगति का चुनाव मनुष्य के वश में हैं।
(v) इस गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर: उपयुक्त शीर्षक: ‘जीवन में सही चुनाव का महत्व’ अथवा ‘संगति का चुनाव’।
8. ‘मातृभूमि’ कविता के आधार पर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की राष्ट्रीय और दार्शनिक भावना का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के प्रतिनिधि राष्ट्रकवि हैं। उनकी कविता ‘मातृभूमि’ देशप्रेम, प्राकृतिक गरिमा और आध्यात्मिक समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है:
- मातृभूमि का देवतुल्य स्वरूप: कवि भारतभूमि को केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि ईश्वर का साकार सगुण रूप मानते हैं। वे कहते हैं कि जिसकी रज में लोट-पोट कर हम बड़े हुए हैं, वह हमारी सच्ची माता है।
- प्राकृतिक सुषमा का चित्रण: नीला आकाश वस्त्र है, सागर जिसकी मेखला (करधनी) है, शेषनाग जिसका सिंहासन है और तारे-सूरज जिसके मुकुट हैं। प्रकृति यहाँ पूरी भव्यता के साथ मातृभूमि की सेवा में लीन है।
- कृतज्ञता और सर्वस्व अर्पण: कवि देशवासियों को स्मरण कराते हैं कि हमारा यह शरीर, अन्न, जल और प्राण सब इसी भूमि की देन हैं। अतः इसके मान-सम्मान और रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करना हमारा परम कर्तव्य है।
9. मुहावरों और लोकोक्तियों के व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए किन्हीं चार मुहावरों का अर्थ एवं वाक्य-प्रयोग प्रस्तुत कीजिए। [2025]
उत्तर: मुहावरे और लोकोक्तियाँ भाषा को सजीव, प्रभावोत्पादक और चुटीला बनाती हैं। इनके प्रयोग से भाषा में लाक्षणिकता और व्यंजना शक्ति का विकास होता है, जिससे साधारण बात भी अत्यंत प्रभावशाली बन जाती है।
(क) अक्ल पर पत्थर पड़ना:
अर्थ: बुद्धि भ्रष्ट होना या समझ काम न करना।
प्रयोग: परीक्षा के समय सब कुछ जानते हुए भी गलत उत्तर लिख आना, मानो मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे।
(ख) अपने पैरों पर खड़ा होना:
अर्थ: आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनना।
प्रयोग: माता-पिता का सपना तभी पूरा होता है जब उनकी संतान पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो जाती है।
(ग) गागर में सागर भरना:
अर्थ: थोड़े शब्दों में बहुत अधिक और गूढ़ बात कहना।
प्रयोग: कवि बिहारी ने अपने दोहों में थोड़े शब्दों में गहरा अर्थ भरकर सचमुच गागर में सागर भर दिया है।
(घ) दाल में काला होना:
अर्थ: किसी बात पर संदेह या गड़बड़ी का आभास होना।
प्रयोग: जब उसने पुलिस को देखकर अपनी गाड़ी की गति अचानक बढ़ा दी, तो तुरंत समझ आ गया कि दाल में कुछ काला है।
10. ‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता के शिल्प-सौंदर्य और भाव-सौंदर्य का विस्तृत विवेचन कीजिए।
उत्तर: पंडित माखनलाल चतुर्वेदी (एक भारतीय आत्मा) द्वारा रचित ‘पुष्प की अभिलाषा’ हिंदी राष्ट्रीय काव्यधारा की सर्वकालिक महान कविताओं में से एक है:
भाव-सौंदर्य: कविता का केंद्रीय भाव निस्वार्थ राष्ट्रसेवा और उत्सर्ग है। पुष्प के माध्यम से कवि ने मानव के भीतर छिपे त्याग के भाव को जगाया है। पुष्प सांसारिक सुखों (सुरबाला के गहनों में गूँथा जाना, प्रेमी की माला में बिंधना या सम्राटों के शव पर चढ़ना) को ठुकरा देता है। उसकी एकमात्र इच्छा मातृभूमि पर प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों के चरणों की धूल बनना है।
शिल्प-सौंदर्य:
-
- भाषा: भाषा अत्यंत सरल, सुबोध, तत्सम-तद्भव युक्त तथा प्रवाहमयी खड़ी बोली है।
- शैली: कविता मानवीकरण अलंकार और संवादात्मक शैली में रचित है, जहाँ पुष्प स्वयं अपनी इच्छा व्यक्त करता है।
- रस और लय: इसमें शांत और वीर रस का अद्भुत सम्मिश्रण है। इसकी गेयता और संक्षिप्तता पाठक के हृदय में गहरी देश-भक्ति का संचार करती है।
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